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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 56

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

सीतल अमल मधुर जल जलज बिपुल बहुरंग। कूजत कल रव हंस गन गुंजत मंजुल भृंग॥56॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उसका जल शीतल, निर्मल और मीठा है, उसमें रंग-बिरंगे बहुत से कमल खिले हुए हैं, हंसगण मधुर स्वर से बोल रहे हैं और भौंरे सुंदर गुंजार कर रहे हैं॥56॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 56 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik