ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 58

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

भव बंधन ते छूटहिं नर जपि जा कर नाम। खर्ब निसाचर बाँधेउ नागपास सोइ राम॥58॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिनका नाम जपकर मनुष्य संसार के बंधन से छूट जाते हैं, उन्हीं राम को एक तुच्छ राक्षस ने नागपाश से बाँध लिया॥58॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 58 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik