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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 59

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

अस कहि चले देवरिषि करत राम गुन गान। हरि माया बल बरनत पुनि पुनि परम सुजान॥59॥

अ
हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

ऐसा कहकर परम सुजान देवर्षि नारदजी श्री रामजी का गुणगान करते हुए और बारंबार श्री हरि की माया का बल वर्णन करते हुए चले॥59॥

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