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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 61

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

बिनु सतसंग न हरि कथा तेहि बिनु मोह न भाग। मोह गएँ बिनु राम पद होइ न दृढ़ अनुराग॥61॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सत्संग के बिना हरि की कथा सुनने को नहीं मिलती, उसके बिना मोह नहीं भागता और मोह के गए बिना श्री रामचंद्रजी के चरणों में दृढ़ (अचल) प्रेम नहीं होता॥61॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 61 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik