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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 6

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

कपि तव दरस सकल दुख बीते। मिले आजुमोहि राम पिरीते॥ बार बार बूझी कुसलाता। तो कहुँ देउँ काह सुन भ्राता॥6॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(भरतजी ने कहा-) हे हनुमान्‌- तुम्हारे दर्शन से मेरे समस्त दुःख समाप्त हो गए (दुःखों का अंत हो गया)। (तुम्हारे रूप में) आज मुझे प्यारे रामजी ही मिल गए। भरतजी ने बार-बार कुशल पूछी (और कहा-) हे भाई! सुनो, (इस शुभ संवाद के बदले में) तुम्हें क्या दूँ?॥6॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 6 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik