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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 7

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

एहि संदेस सरिस जग माहीं। करि बिचार देखेउँ कछु नाहीं॥ नाहिन तात उरिन मैं तोही। अब प्रभु चरित सुनावहु मोही॥7॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इस संदेश के समान (इसके बदले में देने लायक पदार्थ) जगत्‌ में कुछ भी नहीं है, मैंने यह विचार कर देख लिया है। (इसलिए) हे तात! मैं तुमसे किसी प्रकार भी उऋण नहीं हो सकता। अब मुझे प्रभु का चरित्र (हाल) सुनाओ॥7॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 7 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik