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श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 86

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

सुचि सुसील सेवक सुमति प्रिय कहु काहि न लाग। श्रुति पुरान कह नीति असि सावधान सुनु काग॥86॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

पवित्र, सुशील और सुंदर बुद्धि वाला सेवक, बता, किसको प्यारा नहीं लगता? वेद और पुराण ऐसी ही नीति कहते हैं। हे काक! सावधान होकर सुन॥86॥

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श्रीरामचरितमानस दोहा 86 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik