ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीरामचरितमानस · उत्तर काण्ड

उत्तर काण्ड दोहा 8

उत्तर काण्ड · Uttar Kaand

मूल पाठ

तब हनुमंत नाइ पद माथा। कहे सकल रघुपति गुन गाथा॥ कहु कपि कबहुँ कृपाल गोसाईं। सुमिरहिं मोहि दास की नाईं॥8॥

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तब हनुमान्‌जी ने भरतजी के चरणों में मस्तक नवाकर श्री रघुनाथजी की सारी गुणगाथा कही। (भरतजी ने पूछा-) हे हनुमान्‌! कहो, कृपालु स्वामी श्री रामचंद्रजी कभी मुझे अपने दास की तरह याद भी करते हैं?॥8॥

आगे पढ़ें — उत्तर काण्ड के सभी पद · श्रीरामचरितमानस

श्रीरामचरितमानस दोहा 8 उत्तर काण्ड — हिन्दी अर्थ सहित | Pauranik