भक्ति में शांत भाव क्या होता है?
की चेकलिस्ट
शांत भाव: सबसे शांत-स्थिर भक्ति — तीव्र भावना रहित। 5 रसों में प्रथम+आधार। ईश्वर=निर्गुण ब्रह्म। भक्त=शांत-समभावी। गहन शांति+तृप्ति+समत्व। शुकदेव/चार कुमार/शंकराचार्य। 'आप हैं — बस।' ध्यान-प्रधान। 'अहं ब्रह्मास्मि'/'तत्त्वमसि'=मंत्र।
- 1ईश्वर = सर्वव्यापक, निर्गुण, निराकार ब्रह्म
- 2भक्त = शांत, स्थिर, समभावी
- 3तीव्र भावनाएँ (रोना/हँसना/कम्पन) = कम/अनुपस्थित
- 4गहन शांति, तृप्ति, संतोष = प्रधान अनुभव
- 5'सब ठीक है — मैं ठीक हूँ — सब एक है' = शांत भाव
- 6वैराग्य + ज्ञान + भक्ति = संयुक्त
- 7अहंकार अत्यन्त क्षीण
- 8संसार से विरक्ति — परंतु घृणा नहीं
- 9समत्व बुद्धि (सुख-दुःख समान)
- 10ब्रह्मानन्द (ब्रह्म का आनन्द) = स्थिर, शाश्वत
- 11शुकदेव (भागवत वक्ता) = शांत रस भक्त — ब्रह्मज्ञानी+भक्त
- 12चार कुमार (सनक/सनन्दन/सनातन/सनत्कुमार) = शांत रस
- 13शंकराचार्य = ज्ञान+भक्ति = शांत
- 14दास्य = 'मैं आपका दास' (सेवा)
- 15सख्य = 'आप मेरे मित्र' (हँसी-मजाक)
- 16वात्सल्य = 'आप मेरे बच्चे' (प्रेम-चिंता)
- 17माधुर्य = 'आप मेरे प्रियतम' (तीव्र प्रेम)
- 18शांत = 'आप हैं — बस' (शून्य-पूर्ण)
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भक्ति रस
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