दसवां और तेरहवां कर्म कैसे करें?
की चेकलिस्ट
दसवां: अशौच समाप्ति → क्षौर कर्म (मुंडन) → गृह शुद्धि (सफाई-पुताई) → तर्पण-पिण्डदान। तेरहवीं: पूर्ण श्राद्ध संस्कार → हवन → पंचयज्ञ → पिण्डदान → ब्राह्मण भोज → दान-दक्षिणा → शोक समाप्ति। क्षेत्रानुसार 12वें दिन भी।
- 1अशौच समाप्ति: दाह संस्कार से 10वें दिन अशौच (सूतक) समाप्त होता है। यह दिन 'शुद्धि दिवस' कहलाता है।
- 2क्षौर कर्म: मृतक के निकट सम्बन्धी (पुत्र, भाई आदि) क्षौर कर्म (मुंडन/बाल कटवाना) कराते हैं।
- 3गृह शुद्धि: घर की व्यापक सफाई — दीवारों की पुताई, जमीन की धुलाई-लिपाई, वस्त्रों की गर्म जल से धुलाई। मृत्यु से उत्पन्न अशुद्ध कीटाणुओं को दूर करना इसका व्यावहारिक उद्देश्य है।
- 4तर्पण-पिण्डदान: दसवें दिन तर्पण और पिण्डदान किया जाता है।
- 5दान: ब्राह्मणों को दान और भोजन कराने का विधान है।
- 6श्राद्ध संस्कार: तेरहवें दिन पूर्ण मरणोत्तर (श्राद्ध) संस्कार होता है। यह शोक-मोह की पूर्णाहुति का विधिवत आयोजन है।
- 7हवन: देवपूजन, तर्पण के साथ पंचयज्ञ (ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञ, भूतयज्ञ, मनुष्य यज्ञ) किया जाता है।
- 8पिण्डदान: विधिवत पिण्डदान दिया जाता है।
- 9ब्राह्मण भोज: ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। दान-दक्षिणा दी जाती है।
- 10वस्त्र-गौ दान: मृतक की आत्मा की शांति हेतु वस्त्र दान, गोदान, अन्नदान आदि किया जाता है।
- 11शोक समाप्ति: तेरहवीं के बाद सामान्य कर्तव्यों की ओर पुनः ध्यान देना आरम्भ करना चाहिए। शोक को 13 दिन से अधिक नहीं खींचना चाहिए।
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