नवग्रह स्तोत्र(रोज़ 3 min), हनुमान चालीसा, नवग्रह हवन, ग्रह-विशिष्ट बीज मंत्र 108+दान+वार व्रत, रत्न(ज्योतिषी), गरीब सेवा, गीता कर्मयोग। ज्योतिषी से कुंडली-विशिष्ट। कर्म शुद्धि=सबसे बड़ा उपाय।
- 1प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद नवग्रह स्तोत्र का 1 पाठ (3 मिनट)।
- 2*'जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महद्युतिम्...'* — 9 ग्रह एक साथ शांत।
- 3यह एकमात्र स्तोत्र जो सभी 9 ग्रहों को एक साथ संतुलित करता है।
- 4प्रतिदिन 1 बार = सर्व ग्रह शांति।
- 5हनुमान = शनि+राहु+मंगल = तीनों क्रूर ग्रह नियंत्रक।
- 6*'भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै'* = सर्वरक्षा।
- 7प्रत्येक ग्रह का विशिष्ट सामग्री + मंत्र = एक हवन में 9 ग्रह शांत।
- 8योग्य पंडित से करवाएँ — नवरात्रि/ग्रहण/पूर्णिमा पर विशेष प्रभावी।
- 9संबंधित ग्रह का रत्न (ज्योतिषी सलाह अनिवार्य — गलत रत्न = हानि)।
- 10कमजोर ग्रह के वार पर उपवास = ग्रह शांति।
- 11शनि = श्रमिक/गरीब, गुरु = ब्राह्मण/विद्वान, सूर्य = पिता/वृद्ध — संबंधित व्यक्तियों की सेवा।
- 12*'कर्मण्येवाधिकारस्ते'* = कर्मयोग = ग्रह प्रभाव कम, कर्म प्रभाव बढ़ता।
- 13ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर विशिष्ट उपाय लें — सामान्य उपाय = सहायक, कुंडली-विशिष्ट = सर्वोत्तम।
- 14कर्म शुद्धि = सबसे बड़ा उपाय — ईमानदारी, सत्य, सेवा = कोई ग्रह नहीं रोक सकता।
- 15ग्रह दशा = शिक्षा देती है, सज़ा नहीं — कठिन समय = सबसे बड़ा शिक्षक।