की चेकलिस्ट
हां — कभी भी। प्रातः सर्वोत्तम, रात मान्य (भय/संकट विशेष)। 'भूत पिशाच निकट नहिं आवै' — रात = रक्षा। कोई वर्जित नहीं। हनुमान = सदा जागृत, सबसे सुलभ।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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