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महामृत्युंजय मंत्र सिद्धि कैसे करें?

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महामृत्युंजय = 33 अक्षर → पुरश्चरण = 33 लाख। रुद्राक्ष माला अनिवार्य। सोमवार, महाशिवरात्रि, ग्रहण काल विशेष। हवन: तिल-जौ-दूर्वा-घी। रोगी की ओर से परिवार भी कर सकता है। ध्यान: त्र्यम्बक शिव — तीन नेत्र, चंद्रमौलि। सिद्धि: शरीर में उष्णता, स्वप्न में नीलकंठ दर्शन।

  1. 1अर्थ: हम त्र्यम्बक (तीन नेत्रों वाले शिव) की पूजा करते हैं जो सुगंधित और पोषणकर्ता हैं। हमें ककड़ी की भांति मृत्यु के बंधन से मुक्त करें — अमृत से नहीं।
  2. 2सोमवार — महामृत्युंजय जप के लिए विशेष (शिव-वार)
  3. 3ब्रह्ममुहूर्त — सर्वोत्तम
  4. 4महाशिवरात्रि — वर्ष में एक बार — इस दिन जप का फल अनंत
  5. 5सूर्यग्रहण/चंद्रग्रहण — अत्यंत शक्तिशाली
  6. 6माला: रुद्राक्ष माला — अनिवार्य। महामृत्युंजय में रुद्राक्ष ही मान्य।
  7. 7वस्त्र: सफेद या भस्म-वर्ण
  8. 8आसन: कुशासन या ऊनी
  9. 9दिशा: उत्तर या पूर्व मुख
  10. 10प्रत्येक माला के साथ: 'ॐ त्र्यम्बकं...' पूर्ण मंत्र का स्पष्ट उच्चारण
  11. 11'मृत्योर्मुक्षीय' — यहाँ भाव करें कि मृत्यु-भय, रोग, और संकट दूर हो रहे हैं
  12. 12'माऽमृतात्' — मृत्यु से नहीं, अमृत (मोक्ष) से मुक्त न हो — यह नकारात्मक प्रार्थना नहीं, अपितु 'अमृत में बना रहने' का भाव है
  13. 13गंभीर रोगी के लिए: परिवार के सदस्य रोगी की ओर से जप करें
  14. 14दुर्घटना-भय: 11 माला नित्य
  15. 15अकाल मृत्यु-योग में: 1.25 लाख जप एक अनुष्ठान में
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