सुंदरकांड नियम: मंगलवार/शनिवार सायंकाल। विधि: स्नान → लाल/केसरिया वस्त्र → हनुमान चालीसा → सम्पूर्ण सुंदरकांड → हनुमान चालीसा → आरती → प्रसाद। विशेष: 7/11/21/40 दिन निरंतर। बीच में न उठें, मोबाइल बन्द। फल: संकट मुक्ति, शनि शान्ति, शत्रु विजय, बाधा निवारण।
- 1मंगलवार — हनुमान जी का दिन (सर्वश्रेष्ठ)
- 2शनिवार — हनुमान शनि के कष्ट हरते हैं
- 3शनिवार रात्रि से रविवार सुबह — कुछ परम्पराओं में
- 4कोई भी दिन — संकट/कामना विशेष पर
- 5सायंकाल (संध्या) — सर्वाधिक प्रचलित
- 6प्रातःकाल — भी शुभ
- 7रात्रि पाठ — कुछ परम्पराओं में (हनुमान = रात्रि विजेता)
- 8स्नान कर शुद्ध वस्त्र (लाल/केसरिया उत्तम)
- 9आसन पर बैठें — पूर्व या उत्तर मुख
- 10हनुमान जी की मूर्ति/चित्र सामने
- 11दीपक (सरसों तेल/घी), सिंदूर, फूल, प्रसाद रखें
- 12गणपति वंदना ('श्रीगणेशाय नमः')
- 13गुरु वंदना
- 14हनुमान चालीसा (पाठ से पूर्व)
- 15सुंदरकांड पाठ प्रारम्भ — 'शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं...' (दोहा)
- 16सम्पूर्ण सुंदरकांड (दोहा, चौपाई, छंद — सब)
- 17पाठ के बाद हनुमान चालीसा (पुनः)
- 18आरती — 'आरती कीजै हनुमान लला की'
- 19प्रसाद वितरण
- 207 दिन/11 दिन/21 दिन/40 दिन निरंतर पाठ — विशेष कामना पूर्ति
- 21108 बार पाठ (सुंदरकांड शतक) — अत्यन्त शक्तिशाली
- 22सामूहिक पाठ (5/11/21 व्यक्ति मिलकर) — शक्ति बहुगुणित
- 23पाठ के बीच में उठें नहीं
- 24बातचीत/मोबाइल बन्द
- 25अशुद्ध उच्चारण से बचें (अभ्यास करें)
- 26बीच में पाठ न छोड़ें — पूरा करें
- 27सभी बाधाओं/संकटों से मुक्ति (हनुमान = संकटमोचन)
- 28शनि/राहु दोष शान्ति
- 29शत्रु विजय
- 30रोग निवारण
- 31व्यापार/नौकरी में सफलता
- 32भूत-प्रेत/तांत्रिक बाधा निवारण
- 33मनोकामना पूर्ति