की चेकलिस्ट
जप आसन: कुश या ऊनी — भूमि पर सीधे नहीं (ऊर्जा absorb हो जाती है)। मुद्रा: सिद्धासन या सुखासन — रीढ़ सीधी। गीता 6.11: 'न अधिक ऊँचा, न नीचा, स्थिर।' एक ही आसन नित्य उपयोग करें — सिद्ध होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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