मंत्र जप से पूर्व स्नान, शांत स्थान, कुश आसन, पूर्व मुख, संकल्प और गुरु स्मरण करें। माला को अनामिका और अंगूठे से पकड़ें, तर्जनी न लगाएं। मानसिक जप सर्वोत्तम है। जप के बाद माला सिर से लगाकर देवता को अर्पित करें।
- 1माला को दाहिने हाथ की अनामिका और अंगूठे से पकड़ें
- 2तर्जनी (index finger) माला से अलग रखें
- 3सुमेरु (मुख्य मनका) को कभी न लांघें — माला पलटें
- 4प्रत्येक मनके पर एक मंत्र जपें
- 5वाचिक जप — मुख से स्पष्ट बोलना (न्यूनतम फल)
- 6उपांशु जप — होंठ हिलाएं, आवाज न हो (मध्यम फल)
- 7मानसिक जप — केवल मन में (सर्वोत्तम फल)
- 8माला पूर्ण होने पर माला सिर से लगाएं
- 9देवता को जप समर्पित करें: 'अस्य जपस्य फलं श्री [देवता] अर्पणमस्तु'
- 10थोड़ी देर मौन में बैठें
- 11प्रसाद ग्रहण करें
- 12मंत्र और माला की गोपनीयता रखें
- 13नित्य जप: प्रतिदिन नियमित — फल: पाप नाश, मनोशांति
- 14नैमित्तिक जप: विशेष अवसर पर — फल: कामना पूर्ति
- 15काम्य जप: किसी इच्छा हेतु — फल: मनोकामना सिद्धि