श्राद्ध = सम्पूर्ण अनुष्ठान (तर्पण+पिंड+भोजन+दान), घर पर, प्रतिवर्ष। पिंडदान = श्राद्ध का एक अंग (पिंड अर्पण), तीर्थ पर (गया विशेष), पितर मोक्ष हेतु, जीवन में एक बार।
- 1व्यापक अर्थ — पितरों के प्रति श्रद्धापूर्वक किया जाने वाला सम्पूर्ण अनुष्ठान।
- 2क्या शामिल: तर्पण (जल अर्पण) + पिंडदान + ब्राह्मण भोजन + पंचबलि (गाय/कुत्ता/कौवा/चींटी/अग्नि) + दान-दक्षिणा।
- 3कब: प्रतिवर्ष पितृ पक्ष में + मृत्यु तिथि पर।
- 4कहाँ: घर पर भी किया जा सकता है।
- 5संकुचित अर्थ — श्राद्ध का एक अंग — चावल/जौ का पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करना।
- 6विशेष स्थान: गया, प्रयागराज, काशी, हरिद्वार — तीर्थ पर किया जाता है।
- 7उद्देश्य: पितरों को मोक्ष दिलाना (विशेषतः गया में)।
- 8कब: जीवन में एक बार (विशेषतः गया) या पितृ पक्ष में।