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चेकलिस्ट

पितृपक्ष में क्या करना चाहिए और क्या नहीं

की चेकलिस्ट

करें: श्राद्ध-तर्पण, पिण्डदान, ब्राह्मण भोजन, दान, गौ सेवा, कौवे को भोजन, सात्विक आचरण। न करें: विवाह/शुभ कार्य, नई खरीदारी, माँसाहार-मद्यपान, क्रोध-कलह, मसूर-लहसुन-प्याज (श्राद्ध भोजन में)। मूल भावना: पितरों के प्रति श्रद्धा।

  1. 1श्राद्ध/तर्पण: मृत्यु तिथि अनुसार श्राद्ध और तिल-जल से तर्पण अवश्य करें।
  2. 2पिण्डदान: चावल, तिल, जौ के पिण्ड बनाकर दान।
  3. 3ब्राह्मण भोजन और दक्षिणा: विद्वान ब्राह्मण को भोजन कराएँ और दक्षिणा दें।
  4. 4दान: वस्त्र, अन्न, तिल, स्वर्ण, चाँदी, गाय आदि का दान।
  5. 5गौ सेवा: गाय को हरा चारा और रोटी खिलाएँ।
  6. 6कौवे को भोजन: कौवे को पितरों का दूत/वाहक माना गया है, अतः उन्हें भोजन का अंश दें।
  7. 7कुत्ते और चींटियों को भोजन: सनातन परम्परा में इनके लिए भी अंश निकालने का विधान।
  8. 8सात्विक आचरण: शुद्ध भोजन, सत्य बोलना, धैर्य रखना।
  9. 9पितरों का स्मरण और प्रार्थना।
  10. 10शुभ कार्य वर्जित: विवाह, मुण्डन, गृहप्रवेश, नामकरण, नया व्यापार आरम्भ — ये सब पितृपक्ष में न करें।
  11. 11नई वस्तु न खरीदें: नया घर, वाहन, आभूषण, कपड़े (शुभ अवसर हेतु) न खरीदें।
  12. 12माँसाहार, मद्यपान वर्जित (आदर्श रूप में)।
  13. 13बाल न कटवाएँ, नाखून न काटें (कुछ परम्पराओं में)।
  14. 14लहसुन, प्याज, मसूर दाल से बचें (श्राद्ध भोजन में)।
  15. 15क्रोध और कलह से बचें।
  16. 16लोहे के बर्तन में श्राद्ध भोजन न बनाएँ।
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श्राद्ध कर्म

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