प्रातः vs सायं संध्या: (1) समय: प्रातः = सूर्योदय, सायं = सूर्यास्त। (2) दिशा: प्रातः = पूर्व, सायं = पश्चिम। (3) देवता: प्रातः = मित्र/सूर्य, सायं = वरुण। (4) उपस्थान मंत्र भिन्न। (5) गायत्री जप समान। मूल प्रक्रिया (आचमन, मार्जन, अघमर्षण, गायत्री जप) दोनों में समान।
- 1प्रातः संध्या: सूर्योदय से कुछ पूर्व आरम्भ कर सूर्य दिखने तक। आदर्श समय ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से ~1.5 घंटे पहले)।
- 2सायं संध्या: सूर्यास्त के समय, जब तक तारे न दिखें।
- 3प्रातः: पूर्व दिशा की ओर मुख।
- 4सायं: पश्चिम दिशा की ओर मुख (सूर्यास्त की दिशा)।
- 5प्रातः: उगते सूर्य को अर्घ्य — सूर्य देवता की स्तुति प्रधान।
- 6सायं: अस्त होते सूर्य को अर्घ्य — वरुण देवता की उपासना प्रधान।
- 7प्रातः: मित्र देवता का उपस्थान ('मित्रस्य चर्षणीधृतः...')।
- 8सायं: वरुण देवता का उपस्थान ('इमं मे वरुण...')।