सर्वे भवन्तु सुखिनः = सभी सुखी हों, निरोग हों, शुभ देखें, कोई दुःखी न हो। 'सर्वे' = कोई भेद नहीं — सार्वभौमिक प्रार्थना। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' भावना। चार स्तरीय कल्याण: मानसिक सुख, शारीरिक स्वास्थ्य, सौभाग्य, दुःख मुक्ति।
- 1सार्वभौमिकता — 'सर्वे' (सभी) — कोई भेद नहीं। न जाति, न धर्म, न देश, न प्रजाति — सभी प्राणियों का कल्याण। यह हिंदू धर्म की 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (संपूर्ण पृथ्वी एक परिवार) भावना का प्रतिबिंब।
- 2चार स्तरों का कल्याण:
- 3निःस्वार्थता — यह व्यक्तिगत प्रार्थना नहीं, सामूहिक प्रार्थना है। 'मैं' नहीं, 'सब' — यह हिंदू दर्शन की उदारता और करुणा दर्शाता है।
- 4संयुक्त राष्ट्र में — यह मंत्र अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदू दर्शन का प्रतिनिधित्व करता है।