शनि शांति: शनिवार प्रदोष काल → शनि यंत्र स्थापना → 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' 23000 जप → शमी समिधा + काले तिल से हवन → तैलाभिषेक → दान (काला तिल, उड़द, तेल, लोहा, वस्त्र) → हनुमान चालीसा → शनिवार व्रत। ज्योतिषीय परामर्श आवश्यक।
- 1समय: शनिवार का दिन सर्वोत्तम। प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) का समय विशेष शुभ।
- 2संकल्प: पुरोहित के साथ शनि शांति का संकल्प लें। जन्म कुंडली के अनुसार दोष का विवरण संकल्प में सम्मिलित करें।
- 3शनिदेव का आह्वान: शनि यंत्र या शनि प्रतिमा स्थापित करें। काले वस्त्र बिछाएँ। तिल का तेल का दीपक जलाएँ।
- 4मंत्र जप:
- 5हवन: शमी की समिधा और काले तिल से हवन। उड़द, सरसों तेल, लोहचूर्ण की आहुतियाँ।
- 6शनि स्तोत्र पाठ: 'कोणस्थः पिंगलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रोऽन्तको यमः...' शनि स्तोत्र का पाठ।
- 7तैलाभिषेक: शनि प्रतिमा या शनि यंत्र पर सरसों के तेल का अभिषेक।