विस्तृत उत्तर
शनि दोष (साढ़ेसाती, ढैय्या, शनि की महादशा/अन्तर्दशा) के निवारण हेतु शनि शांति पूजा करवाई जाती है।
शनि शांति पूजा की विधि
- 1समय: शनिवार का दिन सर्वोत्तम। प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) का समय विशेष शुभ।
- 1संकल्प: पुरोहित के साथ शनि शांति का संकल्प लें। जन्म कुंडली के अनुसार दोष का विवरण संकल्प में सम्मिलित करें।
- 1शनिदेव का आह्वान: शनि यंत्र या शनि प्रतिमा स्थापित करें। काले वस्त्र बिछाएँ। तिल का तेल का दीपक जलाएँ।
- 1मंत्र जप:
- ▸शनि बीज मंत्र: 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' — 23,000 जप (या कम से कम 108 माला)।
- ▸शनि गायत्री: 'ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात्।'
- 1हवन: शमी की समिधा और काले तिल से हवन। उड़द, सरसों तेल, लोहचूर्ण की आहुतियाँ।
- 1शनि स्तोत्र पाठ: 'कोणस्थः पिंगलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रोऽन्तको यमः...' शनि स्तोत्र का पाठ।
- 1तैलाभिषेक: शनि प्रतिमा या शनि यंत्र पर सरसों के तेल का अभिषेक।
- 1दान (अत्यंत महत्वपूर्ण):
- ▸काले तिल, काला उड़द, काला वस्त्र, सरसों का तेल, लोहे की वस्तु।
- ▸शनिवार को छायादान (तिल तेल में अपना प्रतिबिम्ब देखकर दान)।
- ▸नीलम रत्न या लोहे की अंगूठी धारण (ज्योतिषी के परामर्श से)।
- 1शनि मंदिर दर्शन: शनिवार को शनि मंदिर में जाकर तेल चढ़ाएँ।
अतिरिक्त उपाय
- ▸शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ (शनि पर हनुमान जी की कृपा)।
- ▸शनिवार को पीपल के वृक्ष में सरसों तेल का दीपक।
- ▸शनिवार व्रत (साढ़ेसाती/ढैय्या काल में)।
विशेष: शनि दोष शांति पूजा का विधान कुंडली के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है। विश्वसनीय ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।





