भ्रूमध्य (आज्ञा चक्र) पर ध्यान केंद्रित। पद्मासन में, आंखें बंद, शिव के ज्योतिर्मय तीसरे नेत्र की कल्पना। 'ॐ' दीर्घ जप। 10-30 मिनट। महामृत्युंजय मंत्र सहायक। लाभ: अंतर्दृष्टि, एकाग्रता, आज्ञा चक्र जागरण। अत्यधिक जोर से न करें।
- 1तैयारी: प्रातःकाल या संध्या समय शांत, स्वच्छ स्थान पर पद्मासन/सुखासन में बैठें। रीढ़ सीधी रखें।
- 2प्रारंभ: आंखें बंद करें। 3 बार 'ॐ नमः शिवाय' जपें।
- 3भ्रूमध्य पर ध्यान: दोनों भौंहों के बीच (ललाट मध्य) पर ध्यान केंद्रित करें। कल्पना करें कि वहां शिव का तीसरा नेत्र है — ज्योतिर्मय, प्रकाशमान।
- 4श्वास: धीमी, गहरी श्वास लें। श्वास छोड़ते समय 'ॐ' का मानसिक जप करें।
- 5दृश्य कल्पना: शिव के त्रिनेत्र से नीली/श्वेत ज्योति निकलती हुई कल्पना करें — यह ज्योति आपके ललाट को प्रकाशित कर रही है।
- 6अवधि: 10-15 मिनट से आरंभ करें, धीरे-धीरे 30 मिनट तक बढ़ाएं।
- 7समापन: धीरे-धीरे आंखें खोलें। शिव को प्रणाम करें।