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शिव मंत्र जप में तर्जनी अंगुली का उपयोग क्यों वर्जित है?

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तर्जनी = अहंकार का प्रतीक। मंत्र जप में अहंकार त्याग आवश्यक, इसलिए तर्जनी से माला स्पर्श वर्जित। सही विधि: अंगूठा + मध्यमा अंगुली से माला फेरें। अनामिका: मोक्ष जप। तर्जनी: केवल अभिचार कर्म (सामान्य भक्त हेतु वर्जित)। गोमुखी में जप करने से तर्जनी स्वतः बाहर रहती है।

  1. 1माला को दाहिने हाथ में रखें।
  2. 2अंगूठे और मध्यमा अंगुली से माला फेरें — यह सामान्य और सर्वमान्य विधि है।
  3. 3कुछ विशेष उद्देश्यों के लिए भिन्न विधि भी है:
  4. 4मध्यमा अंगुली: सामान्य जप, भौतिक सुख-समृद्धि
  5. 5अनामिका अंगुली: मोक्ष प्राप्ति के लिए
  6. 6तर्जनी अंगुली: केवल शत्रु-मारण आदि अभिचार कर्मों में (जो सामान्य भक्त के लिए वर्जित ही है)
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