श्मशान भैरव = शिव का उग्र तांत्रिक स्वरूप। गुरु दीक्षा अनिवार्य — बिना गुरु कदापि न करें। काल: अर्धरात्रि, अमावस्या, अष्टमी। बटुक भैरव मंत्र अपेक्षाकृत सौम्य विकल्प। कठोर नियम: ब्रह्मचर्य, गोपनीयता, एकांत। गलत प्रयोग से गंभीर दुष्परिणाम संभव। केवल प्रमाणिक गुरु से ही सीखें।
- 1रात्रि का समय (विशेषतः अर्धरात्रि)
- 2अमावस्या या अष्टमी तिथि
- 3कालाष्टमी (प्रत्येक मास की कृष्ण अष्टमी)
- 4भैरवाष्टमी (मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी)
- 5यह बटुक भैरव मंत्र अपेक्षाकृत सौम्य है और भय निवारण, रक्षा के लिए प्रयुक्त होता है।
- 6गुरु दीक्षा अनिवार्य
- 7ब्रह्मचर्य का कठोर पालन
- 8तामसिक आहार कुछ तांत्रिक विधानों में विहित है (परंपरा भिन्न)
- 9काले वस्त्र, काली माला
- 10श्मशान या एकांत स्थान
- 11गोपनीयता अत्यावश्यक
- 12बिना गुरु दीक्षा के
- 13भयभीत या मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति
- 14बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं
- 15जिनकी मूल साधना (नित्य पूजा, जप) नियमित न हो