संध्या वंदन में प्राणायाम कैसे करें
की चेकलिस्ट
संध्या प्राणायाम: सप्त व्याहृतियों + गायत्री मंत्र के साथ। पूरक (बायीं नासिका से श्वास भरना) → कुम्भक (दोनों बन्द, श्वास रोकना) → रेचक (दाहिनी से छोड़ना)। 5 प्राणायाम = पंचप्राण शुद्धि। अनुपात: 1:4:2 (आदर्श)। मन में मंत्र जप। गायत्री जप की तैयारी।
- 1दाहिने हाथ के अँगूठे से दाहिनी नासिका बन्द करें।
- 2बायीं नासिका से धीरे-धीरे गहरी श्वास भरें।
- 3मन में उपरोक्त मंत्र का जप करें।
- 4दोनों नासिकाओं को बन्द करें (अँगूठे से दाहिनी, अनामिका-कनिष्ठिका से बायीं)।
- 5श्वास को यथाशक्ति रोकें।
- 6मन में मंत्र जप।
- 7बायीं नासिका बन्द रखते हुए दाहिनी से धीरे-धीरे श्वास छोड़ें।
- 8मन में मंत्र जप।
- 9मन की एकाग्रता।
- 10शरीर-मन की शुद्धि।
- 11गायत्री जप की तैयारी।
- 12प्राणशक्ति का संचय।
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