दीर्घायु साधना: महामृत्युंजय (सर्वश्रेष्ठ — सवा लाख जप), रुद्राभिषेक, रसायन (पारद/आमलकी/अश्वगन्धा), सूर्य उपासना (आदित्य हृदय), कुंडलिनी योग (कोशिका नवीनीकरण), तांत्रिक प्राणायाम। कुलार्णव: दीर्घायु साधना के लिए — बिना साधना के व्यर्थ।
- 1ऋग्वेद का यह मंत्र 'मृत्यु को जीतने वाला' माना गया है
- 2सवा लाख (1,25,000) जप = सिद्धि
- 3नित्य 108 बार जप = दीर्घायु और रोग-निवारण
- 4दशांश हवन (12,500 आहुतियाँ) करने से प्रभाव बहुगुणित
- 5शिव उपासना — शिवलिंग पर नित्य रुद्राभिषेक
- 6बिल्व पत्र अर्पण
- 7सोमवार व्रत
- 8पारद सेवन (अष्टसंस्कारित — केवल योग्य वैद्य के निर्देश में)
- 9आमलकी (आँवला) रसायन — मंत्र-सिद्ध
- 10अश्वगन्धा + स्वर्ण भस्म + शिलाजीत — मंत्रों से अभिमंत्रित
- 11नित्य प्रातः सूर्य नमस्कार
- 12आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ
- 13सूर्य के गायत्री मंत्र का 108 बार जप
- 14सूर्य = प्राण शक्ति का स्रोत — दीर्घायु का प्रत्यक्ष दाता
- 15कुम्भक प्राणायाम — श्वास को रोकने का अभ्यास
- 16तंत्र में कहा गया: 'जितने श्वास बचाए — उतना जीवन बढ़ा'
- 17नीलम या गोमेद रत्न (ज्योतिष अनुसार)
- 18पंचमुखी रुद्राक्ष धारण
- 19नियमित सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य, और नियमित दिनचर्या