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काम्य = इच्छापूर्ति कर्म (करें=फल, न करें=दोष नहीं)। उदाहरण: लक्ष्मी (धन), संतान गोपाल, महामृत्युंजय (रोग), बगलामुखी (शत्रु)। गीता: निष्काम > काम्य। तंत्र: काम्य मान्य (भोग से योग), अंतिम लक्ष्य = मोक्ष।
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