तंत्र में काम्य कर्म क्या होते हैं?
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काम्य = इच्छापूर्ति कर्म (करें=फल, न करें=दोष नहीं)। उदाहरण: लक्ष्मी (धन), संतान गोपाल, महामृत्युंजय (रोग), बगलामुखी (शत्रु)। गीता: निष्काम > काम्य। तंत्र: काम्य मान्य (भोग से योग), अंतिम लक्ष्य = मोक्ष।
- 1नित्य: अनिवार्य दैनिक (संध्या, जप) — न करने = पाप।
- 2नैमित्तिक: विशेष अवसर (नवरात्रि, श्राद्ध) — अवसर = अनिवार्य।
- 3काम्य: इच्छानुसार — करने = विशेष फल, न करने = कोई दोष नहीं।
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तंत्र शास्त्र
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