न तोड़ें: रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति, रात। कैसे: सुबह, शुद्ध हाथ, 'ॐ तुलस्यै नमः'+क्षमा, दाहिना हाथ, जरूरत जितने। पहले दिन तोड़कर रखें।
- 1रविवार — पूर्णतः वर्जित।
- 2एकादशी/द्वादशी — विष्णु विशेष दिन, तुलसी विश्राम।
- 3संक्रांति दिन।
- 4रात में — सूर्यास्त बाद वर्जित।
- 5मासिक धर्म — कुछ परंपरा में।
- 6सुबह स्नान के बाद, शुद्ध हाथों से।
- 7तोड़ने से पहले 'ॐ तुलस्यै नमः' बोलें + क्षमा माँगें।
- 8डाली/शाखा न तोड़ें — केवल पत्ते।
- 9दाहिने हाथ से (कुछ परंपरा)।
- 10जरूरत जितने ही तोड़ें — फालतू नहीं।