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उपनिषद में ब्रह्म का वर्णन कैसे है?

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उपनिषदों में ब्रह्म को 'सत्यं ज्ञानमनन्तं' (तैत्तिरीय 2/1) और 'नेति नेति' (बृहदारण्यक 3/9/26) से परिभाषित किया गया है। केनोपनिषद कहता है — ब्रह्म मन-इंद्रियों से परे है। चार महावाक्य — 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि', 'प्रज्ञानं ब्रह्म', 'अयमात्मा ब्रह्म' — उपनिषदों का सार हैं।

  1. 1प्रज्ञानं ब्रह्म (ऐतरेय) — चेतना ही ब्रह्म है
  2. 2अहं ब्रह्मास्मि (बृहदारण्यक) — मैं ब्रह्म हूँ
  3. 3तत्त्वमसि (छान्दोग्य) — वह तू ही है
  4. 4अयमात्मा ब्रह्म (माण्डूक्य) — यह आत्मा ब्रह्म है
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