माता महालक्ष्मी / महालक्ष्मी अष्टकम् (इन्द्र कृत) स्तोत्र मंत्र
ॐ नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शंख चक्र गदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29
समस्त सिद्धियों की प्राप्ति, धन-धान्य का लाभ, महापापों का नाश और भयंकर शत्रुओं का विनाश 29।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
समस्त सिद्धियों की प्राप्ति, धन-धान्य का लाभ, महापापों का नाश और भयंकर शत्रुओं का विनाश 29।
इस मंत्र से क्या होगा?
समस्त सिद्धियों की प्राप्ति, धन-धान्य का लाभ, महापापों का नाश और भयंकर शत्रुओं का विनाश
जाप विधि
नियमित रूप से पूर्ण श्रद्धा के साथ एक, दो या तीन काल (सुबह, दोपहर, शाम) में पाठ करें 29।
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navgrah mantraॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥
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