सुदर्शन तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ सहस्रार हुं फट्
अस्त्र सिद्धि की प्राप्ति, घोर शत्रुओं का संहार और महा-विपत्तियों से तात्कालिक सुरक्षा 59।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अस्त्र सिद्धि की प्राप्ति, घोर शत्रुओं का संहार और महा-विपत्तियों से तात्कालिक सुरक्षा 59।
इस मंत्र से क्या होगा?
अस्त्र सिद्धि की प्राप्ति, घोर शत्रुओं का संहार और महा-विपत्तियों से तात्कालिक सुरक्षा
जाप विधि
पाञ्चरात्र आगम (अहिर्बुध्न्य संहिता) के अनुसार षडक्षर मंत्र का अंग न्यास सहित जप किया जाता है। अपामार्ग समिधा, तिल और पंचगव्य से आहुति दी जाती है 59।
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ॐ गण गणपतये नमः
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
beej mantraवं, शं, षं, सं
ugra mantraउच्छिष्ट चांडालिनी सुमुखी देवी महापिशाचिनी ह्रीं ठः ठः ठः
dhyan mantraकस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥
stotra mantraनमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि । सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29