उच्छिष्ट गणपति तांत्रिक तांत्रिक मंत्र
ॐ अं अणिमायै नमः स्वाहा
पति-पत्नी के मध्य विवाद की त्वरित शांति, अणिमा आदि अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति और कुबेर के समान भौतिक ऐश्वर्य की सिद्धि 71।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
पति-पत्नी के मध्य विवाद की त्वरित शांति, अणिमा आदि अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति और कुबेर के समान भौतिक ऐश्वर्य की सिद्धि 71।
इस मंत्र से क्या होगा?
पति-पत्नी के मध्य विवाद की त्वरित शांति, अणिमा आदि अष्ट सिद्धियों की प्राप्ति और कुबेर के समान भौतिक ऐश्वर्य की सिद्धि
जाप विधि
इस वाममार्गी अष्ट-सिद्धि साधना में पवित्रता का कोई नियम (तिथि, नक्षत्र, उपवास) लागू नहीं होता। भोजन के उपरांत जूठे मुँह (Ucchishta state) जप करने का विशेष तांत्रिक विधान है। 16,000 जप पुरश्चरण के लिए निर्धारित हैं। अणिमा सिद्धि हेतु पूर्व दिशा की ओर मुख करके जप करें (अन्य सिद्धियों—प्राप्ति, महिमा, ईशित्व, वशित्व, कामावसायिता, गरिमा, सिद्धि—के लिए क्रमशः आग्नेय, दक्षिण, नैऋत्य, पश्चिम, वायव्य, उत्तर और ईशान दिशा की ओर मुख करें) 70।
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ॐ अं अणिमायै नमः स्वाहा ।
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
naam mantraराधे राधे
kaamya mantraॐ पातु शिरसि नित्यं पातु ह्रीं कण्ठदेशके। नृसिंह पातु हृदये आपदुद्धारणाय च॥
bhakti mantraॐ नमः शिवाय
mool mantraॐ ऐं इन्द्राय नमः (वैवाहिक सिद्धि हेतु: ॐ लं इन्द्राय नमः)