उग्र नृसिंह गायत्री सिद्ध मंत्र
ॐ उग्र नरसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंहः प्रचोदयात् ॥
असीम शौर्य, साहस और निर्भयता की प्राप्ति 66। यह मारक ग्रह दशाओं (Planetary afflictions) को शांत करता है और भयंकर तंत्र प्रयोगों से साधक की रक्षा करता है 66।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
असीम शौर्य, साहस और निर्भयता की प्राप्ति 66। यह मारक ग्रह दशाओं (Planetary afflictions) को शांत करता है और भयंकर तंत्र प्रयोगों से साधक की रक्षा करता है 66।
इस मंत्र से क्या होगा?
असीम शौर्य, साहस और निर्भयता की प्राप्ति 66
यह मारक ग्रह दशाओं (Planetary afflictions) को शांत करता है और भयंकर तंत्र प्रयोगों से साधक की रक्षा करता है
जाप विधि
भगवान नृसिंह के उग्र (Fierce) रूप का पूर्ण एकाग्रता से ध्यान कर जप किया जाता है 66।
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ॐ नमो नारायणाय
kavach mantraपातु श्रवणे वासरेश्वर घ्राणं धर्म पातु पदन वेदवाहन जीवा मानद पातु कंठ में सुरवंदित स्कंद प्रभाकर पातु वक्ष पातु जन प्रिय पातु पाद द्वादशात्मा सर्व सर्वांग सकलेश्वर यक्ष गन्धर्व राक्षसाः ब्रह्मराक्षस वेतालाः क्षमा दूरा देव पलायंते तस्य संकीर्तना अज्ञात कवच दिव्य यो जपे सूर्य मंत्रम् सिद्धि जायते तस्य कल्पकोटि शतैरपि। इति श्री ब्रह्मयामले त्रैलोक्य मंगलम नाम सूर्य कवचम संपूर्णम। 15
beej mantraक्लीं
ugra mantraक्लीं क्लीं हूं
dhyan mantraॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
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