बगलामुखी महाविद्या (छत्तीस अक्षरी महामंत्र) सिद्ध मंत्र
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ॥
वाक् सिद्धि और सर्वोच्च स्तम्भन (Paralyzing force) 2। यह विरोधियों की वाणी, बुद्धि और गति को जड़ कर देता है 3। गंभीर मुकदमों में विजय, राजनीतिक या व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में अजेयता, और साधक के चारों
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
वाक् सिद्धि और सर्वोच्च स्तम्भन (Paralyzing force) 2। यह विरोधियों की वाणी, बुद्धि और गति को जड़ कर देता है 3। गंभीर मुकदमों में विजय, राजनीतिक या व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में अजेयता, और साधक के चारों ओर अभेद्य विद्युत-चुम्बकीय सुरक्षा कवच (Electromagnetic shield) का निर्माण करता है 2।
इस मंत्र से क्या होगा?
वाक् सिद्धि और सर्वोच्च स्तम्भन (Paralyzing force) 2
यह विरोधियों की वाणी, बुद्धि और गति को जड़ कर देता है 3
गंभीर मुकदमों में विजय, राजनीतिक या व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में अजेयता, और साधक के चारों ओर अभेद्य विद्युत-चुम्बकीय सुरक्षा कवच (Electromagnetic shield) का निर्माण करता है
जाप विधि
१.२५ लाख जप द्वारा सिद्ध किया जाता है 3। ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः ४ बजे) में पूर्व या उत्तर मुख होकर, पीले वस्त्र, पीला आसन और हल्दी की माला का उपयोग अनिवार्य है 3। देवी को पीले पुष्प (गेंदा) अर्पित करें 3। मंत्र का जप वागस तंत्रिका को स्पंदित करने के लिए स्पष्ट और लयबद्ध होना चाहिए 2।
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ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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beej mantraजूं
navgrah mantraॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपिणे केतवे ऐं सौः स्वाहा॥
mool mantraॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगतपते देही मे तनय कृष्ण त्वामह शरणं गतः
dhyan mantraसोऽहम्