महा काली (गायत्री सिद्धि) सिद्ध मंत्र
ॐ महा काल्यै छ विद्महे स्मसन वासिन्यै छ धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात
साधक के स्थूल और सांसारिक विचारों का दिव्य चेतना में रूपांतरण 17। यह अज्ञानता और मृत्यु के भय को नष्ट कर, साधक के मन को भौतिकता से निकालकर काली की शुद्ध और सूक्ष्म चेतना (Pure consciousness) के प्रकाश
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
साधक के स्थूल और सांसारिक विचारों का दिव्य चेतना में रूपांतरण 17। यह अज्ञानता और मृत्यु के भय को नष्ट कर, साधक के मन को भौतिकता से निकालकर काली की शुद्ध और सूक्ष्म चेतना (Pure consciousness) के प्रकाश में स्थापित करने का कार्य करता है 17।
इस मंत्र से क्या होगा?
साधक के स्थूल और सांसारिक विचारों का दिव्य चेतना में रूपांतरण 17
यह अज्ञानता और मृत्यु के भय को नष्ट कर, साधक के मन को भौतिकता से निकालकर काली की शुद्ध और सूक्ष्म चेतना (Pure consciousness) के प्रकाश में स्थापित करने का कार्य करता है
जाप विधि
गुरु दीक्षा उपरांत एकाग्रता पूर्वक नित्य जप किया जाता है 17। ध्यान के समय देवी को 'श्मशान वासिनी' के रूप में देखा जाता है, जो सांसारिक माया को भस्म करने वाली हैं 17। साधक अपनी संपूर्ण ऊर्जा को देवी पर केंद्रित कर, उनसे आध्यात्मिक वरदान की याचना करता है 17।
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ॐ श्री दुर्गायै नमः
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
beej mantraदं
ugra mantraॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं ॐ
dhyan mantraकस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभं नासाग्रे नवमौक्तिकं करतले वेणुं करे कङ्कणम्। सर्वाङ्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलिं गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणिः॥
stotra mantraसर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥ 24