ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
महा काली (गायत्री सिद्धि)

महा काली (गायत्री सिद्धि) सिद्ध मंत्र

ॐ महा काल्यै छ विद्महे स्मसन वासिन्यै छ धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात

साधक के स्थूल और सांसारिक विचारों का दिव्य चेतना में रूपांतरण 17। यह अज्ञानता और मृत्यु के भय को नष्ट कर, साधक के मन को भौतिकता से निकालकर काली की शुद्ध और सूक्ष्म चेतना (Pure consciousness) के प्रकाश

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारसिद्ध मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

साधक के स्थूल और सांसारिक विचारों का दिव्य चेतना में रूपांतरण 17। यह अज्ञानता और मृत्यु के भय को नष्ट कर, साधक के मन को भौतिकता से निकालकर काली की शुद्ध और सूक्ष्म चेतना (Pure consciousness) के प्रकाश में स्थापित करने का कार्य करता है 17।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

साधक के स्थूल और सांसारिक विचारों का दिव्य चेतना में रूपांतरण 17

02

यह अज्ञानता और मृत्यु के भय को नष्ट कर, साधक के मन को भौतिकता से निकालकर काली की शुद्ध और सूक्ष्म चेतना (Pure consciousness) के प्रकाश में स्थापित करने का कार्य करता है

जाप विधि

गुरु दीक्षा उपरांत एकाग्रता पूर्वक नित्य जप किया जाता है 17। ध्यान के समय देवी को 'श्मशान वासिनी' के रूप में देखा जाता है, जो सांसारिक माया को भस्म करने वाली हैं 17। साधक अपनी संपूर्ण ऊर्जा को देवी पर केंद्रित कर, उनसे आध्यात्मिक वरदान की याचना करता है 17।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

shanti mantra

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

naam mantra

पशुपतिनाथ

dhyan mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

vaidik mantra

ॐ येन कर्मण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः । यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।

sabar mantra

ओम गुरु जी शिव बैठे कैलाश विष्णु बैठे बैकुंठ मेरी भक्ति शिव की शक्ति पूजू अमुक देव मनाऊं तो आवे ना आवे तो दुहाई शिव शंकर की दुहाई माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की 1

ugra mantra

ॐ ह्रीं श्रीं उग्र तारे तुतारे देवदत्त फट्