भगवान श्री कृष्ण एवं श्री राम (युगल स्वरूप) भक्ति मंत्र
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे
कलियुग में यह महामंत्र हृदय की पूर्ण शुद्धि, अज्ञानता के अंधकार का नाश, और भगवान के प्रति शुद्ध 'प्रेमा भक्ति' प्राप्त करने का सर्वोच्च और एकमात्र साधन माना गया है 18। यह जीव के झूठे अहंकार को नष्ट कर
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कलियुग में यह महामंत्र हृदय की पूर्ण शुद्धि, अज्ञानता के अंधकार का नाश, और भगवान के प्रति शुद्ध 'प्रेमा भक्ति' प्राप्त करने का सर्वोच्च और एकमात्र साधन माना गया है 18। यह जीव के झूठे अहंकार को नष्ट कर परब्रह्म के साथ उसके शाश्वत स्वरूप को एकाकार करता है और भवसागर से मोक्ष दिलाता है 18।
इस मंत्र से क्या होगा?
कलियुग में यह महामंत्र हृदय की पूर्ण शुद्धि, अज्ञानता के अंधकार का नाश, और भगवान के प्रति शुद्ध 'प्रेमा भक्ति' प्राप्त करने का सर्वोच्च और एकमात्र साधन माना गया है 18
यह जीव के झूठे अहंकार को नष्ट कर परब्रह्म के साथ उसके शाश्वत स्वरूप को एकाकार करता है और भवसागर से मोक्ष दिलाता है
जाप विधि
वैष्णव और विशेषकर गौड़ीय संप्रदाय में इस ३२ अक्षरों वाले महामंत्र का जप तुलसी की माला पर किया जाता है 1। साधकों को प्रतिदिन न्यूनतम १६ माला (१७२८ बार) जप का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए 1। जप करते समय प्रत्येक शब्द के उच्चारण को स्वयं स्पष्ट रूप से सुनना (श्रवण) आवश्यक है; यदि मन भटके तो उसे बलपूर्वक पुनः मंत्र की ध्वनि पर केंद्रित करना चाहिए 20। इसे कीर्तन के रूप में करताल और मृदंग के साथ सामूहिक रूप से उच्च स्वर में जपा जा सकता है, अथवा एकांत में उपांशु या मानसिक रूप से जपा जा सकता है 1।
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