भैरव एवं मशान (रक्षा एवं मारण काट) शाबर मंत्र
झाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25
इस उग्र शाबर मंत्र का प्रयोजन श्मशान से उत्पन्न होने वाली भयंकर नकारात्मक ऊर्जाओं (मशान) और तामसिक भैरव शक्तियों को बलपूर्वक बांधना और उन्हें अपने पूर्ण नियंत्रण में लेना है 25। यह मंत्र साधक के चारों
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
इस उग्र शाबर मंत्र का प्रयोजन श्मशान से उत्पन्न होने वाली भयंकर नकारात्मक ऊर्जाओं (मशान) और तामसिक भैरव शक्तियों को बलपूर्वक बांधना और उन्हें अपने पूर्ण नियंत्रण में लेना है 25। यह मंत्र साधक के चारों ओर 'लोहार किला' (लोहे के किले) जैसी एक अभेद्य अतीन्द्रिय संरचना का निर्माण करता है। जब किसी व्यक्ति पर अत्यंत उग्र श्मशानी शक्तियों का प्रहार किया गया हो, तब इस मंत्र के माध्यम से उन शक्तियों को कटार और मुद्गर की अदृश्य मार से डरा कर और बाध्य कर (मुद्गर धिनि) पीड़ित के शरीर से निष्कासित किया जाता है 25। यह मारण तंत्र को काटने का सबसे हिंसक और त्वरित अस्त्र है।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस उग्र शाबर मंत्र का प्रयोजन श्मशान से उत्पन्न होने वाली भयंकर नकारात्मक ऊर्जाओं (मशान) और तामसिक भैरव शक्तियों को बलपूर्वक बांधना और उन्हें अपने पूर्ण नियंत्रण में लेना है 25
यह मंत्र साधक के चारों ओर 'लोहार किला' (लोहे के किले) जैसी एक अभेद्य अतीन्द्रिय संरचना का निर्माण करता है
जब किसी व्यक्ति पर अत्यंत उग्र श्मशानी शक्तियों का प्रहार किया गया हो, तब इस मंत्र के माध्यम से उन शक्तियों को कटार और मुद्गर की अदृश्य मार से डरा कर और बाध्य कर (मुद्गर धिनि) पीड़ित के शरीर से निष्कासित किया जाता है 25
यह मारण तंत्र को काटने का सबसे हिंसक और त्वरित अस्त्र है
जाप विधि
यह एक अत्यंत आदिम, भयंकर और शक्तिशाली कपालिक/नाथ शाबर मंत्र है 25। इसकी सिद्धि श्मशान भूमि या किसी घने एकांत वन में मध्यरात्रि के समय की जाती है। इस विधान में साधक का वेश और मुद्रा अत्यंत आक्रामक होती है; साधक को अपने वाम हाथ (बाएं हाथ) में 'चामदड़ि' (चमड़े की डोरी या विशिष्ट तंत्र वस्तु) और दाहिने हाथ में लोहे की 'कटार' या 'मुद्गर' रखना होता है। जप के दौरान साधक एक वीर रस (आक्रामक तांत्रिक मुद्रा) में रहता है और अपने खुले केशों को बांध कर इस मंत्र का भयंकर हुंकार के साथ उच्चारण करता है 25। यह अत्यंत उग्र विधान है जिसका उपयोग सामान्य दिनों में नहीं, अपितु केवल प्राण-संकट या घोर तांत्रिक युद्ध की विकट परिस्थितियों में ही किया जाता है।
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स्कन्धौ पातु गजस्कन्धः स्तनौ विघ्नविनाशनः । हृदयं गणनाथस्तु हेरम्बो जठरं महान् ॥ धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरः शुभः । लिङ्गं गुह्यं सदा पातु वक्रतुण्डो महाबलः ॥ गणक्रीडो जानुजङ्घे ऊरू मङ्गलमूर्तिमान् । एकदन्तो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदाऽवतु ॥ क्षिप्रप्रसादनो बाहू पाणी आशाप्रपूरकः । अङ्गुलीश्च नखान्पातु पद्महस्तोऽरिनाशनः ॥ सर्वाङ्गानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदाऽवतु । अनुक्तमपि यत्स्थानं धूम्रकेतुः सदाऽवतु ॥ आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोऽवतु । प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः । प्रतीच्यां विघ्नहर्ताऽव्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्यामीशनन्दनः । दिवाऽव्यादेकदन्तस्तु रात्रौ सन्ध्यासु विघ्नहृत् ॥ 14
bhakti mantraराम राम
tantrik mantraॐ सहस्रार हुं फट्
beej mantraह्रीं हुं
dhyan mantraॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
jap mantraॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय वैराजमूर्तये मेघात्मने श्रीं नरसिंहवपुषे नमः