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शाबर मंत्र

लोक भाषा के सिद्ध मंत्र

24 मंत्र
पिशाच एवं दुष्ट दृष्टि निवारण (लोक तांत्रिक प्रयोग)

ओम नमो भूत प्रेत पिशाच दुष्ट दृष्टि विनाशाय ओम क्लीम स्वाहा 27

इस तांत्रिक लोक-प्रयोग का प्रयोजन किसी ईर्ष्यालु व्यक्ति की अत्यंत दुष्ट दृष्टि, भूत-प्रेत की सूक्ष्म अतीन्द्रिय बाधा और पिशाच श्रेणी की नीच ऊर्जाओं का त्वरित व…

कामरूप कामाख्या (सर्व इच्छा पूर्ति तंत्र)

ओम नमो आदेश गुरु को कामरूप कामाख्या माई अपनी शक्ति से अमुक मेरी इच्छा पूरी करो ना करो तो ईश्वर महादेव की दुहाई 19

यह मंत्र जीवन के हर क्षेत्र की बाधाओं को नष्ट कर एक अचूक 'इच्छा-पूर्ति कल्पवृक्ष' के रूप में निर्मित है 19। चाहे वह मनचाहे रोजगार (Job) की प्राप्ति हो, असीमित ध…

लोना चमारिन (मोहिनी विद्या एवं अचूक वशीकरण)

दुहाई लोना चमारिन की, आन बीर मसान की (अमुक का नाम) 20

इस अमोघ मंत्र का प्रधान प्रयोजन अचूक वशीकरण, तीव्र सम्मोहन और रूठे हुए या दूर जाते व्यक्तियों को बलपूर्वक अपने समीप लाना है 20। यदि कार्यक्षेत्र (ऑफिस), परिवार…

गणपति एवं साईं गोरखनाथ (विघ्न निवारण सबदी)

ओम नमो आदेश गुरु जी को आदेश पहला गण गणपति 14 विद्या सारथी जति सती कैलाशपति बल भीम मारुती आले विघ्न निवारी साईं गोरखनाथ की दुआही गुरु की शक्ति मेरी भक्ति चले मंत्र ईश्वरी वाचा पिंड कच्चा गुरु गोरखनाथ का शब्द सच्चा 24

इसका मुख्य प्रयोजन किसी भी तांत्रिक प्रयोग, भौतिक कार्य या लंबी यात्रा में आने वाले अप्रत्याशित और भयंकर विघ्नों (आले विघ्न) का समूल निवारण करना है 24। यह मंत्र…

लोक साधना (नजर एवं दृष्टि दोष निवारण)

ओम ह्रीम नजर उतरजा कुरु कुरु स्वाहा 26

इसका विशुद्ध प्रयोजन मानव शरीर, मस्तिष्क और आभामंडल (Aura) पर लगी हुई 'बुरी नजर' (Evil Eye) के नकारात्मक प्रभावों को त्वरित रूप से काटना और नष्ट करना है 26। बुर…

राजा रामचन्द्र एवं गोरखनाथ (बंगाली नाथ रक्षा बाण)

राम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25

इस मंत्र का केंद्रीय प्रयोजन दूर-स्थानीय (Telepathic/Tantric) अस्त्रों और मारण प्रहारों से साधक के प्राणों और शरीर (अंगे) की रक्षा करना है 25। यह मंत्र शत्रु द्…

भैरव एवं मशान (रक्षा एवं मारण काट)

झाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25

इस उग्र शाबर मंत्र का प्रयोजन श्मशान से उत्पन्न होने वाली भयंकर नकारात्मक ऊर्जाओं (मशान) और तामसिक भैरव शक्तियों को बलपूर्वक बांधना और उन्हें अपने पूर्ण नियंत्र…

महादेवी एवं गुरु गोरखनाथ सर्वकार्य सिद्धि

ओम नमो महादेवी सर्व कार्य सिद्धि करनी जो पाती पूरे ब्रह्मा विष्णु महेश तीनों देवन मेरी भक्ति गुरु की शक्ति श्री गुरु गोरखनाथ की दुहाई फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा 3

इस शाबर प्रयोग का मुख्य प्रयोजन उन असाध्य, अत्यंत जटिल भौतिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक कार्यों की त्वरित सिद्धि है, जो सामान्य मानवीय प्रयासों और वैदिक अनुष्ठानों…

महाकाली अघोर मारण एवं उच्चाटन

ॐ नमो आदेश गुरु का आदेश काली काली महाकाली इन्द्र की बेटी ब्रम्हा की साली चाम की गठरी हाड़ की माला भजो आनन्द सुंदरी बाला। भरपूर वसन करले उठाई काम क्रन्ति कलिका आई लुच्ची मोहन भोग भेट कड़ाही जहा भेजा वहा जाई कष्ट दुखो से लेव बचाई सभी देत्यन को मार भगाई आदि अंत तू रही सहाई में पूत तू मेरी माई सब दुखन से लेव बचाई गुरु की शक्ति हमारी भक्ति फुरे मंत्र दोहाई काली की ईश्वरो वाचा 12

इस अघोर साधना का प्रयोजन उन घोर शत्रुओं का समूल नाश और उच्चाटन (जड़ से उखाड़ फेंकना) करना है जो साधक के जीवन में असहनीय कष्ट, भय और दुख उत्पन्न कर रहे हों 12। म…

मरघट कालिका एवं अघोरी कीनाराम मारण परंपरा

ॐ नमो काली कंकाली पीती भर भर रक्त प्याली चाम की गठड़ी हाड़ की माला भजो आनंद सुंदरी बाला भरपूर वसन कर ले उठाई काम क्रोध कलिका माई लेके अपनी भेंट कड़ाई अमुक की छाती घात चलाई घाट में मरघट कालिका आई कालिका ने अमुक की कच्ची कलेजी खाई न खाई तो कीनाराम औघड़ की दुहाई 12

इस मंत्र का मुख्य और एकमात्र तांत्रिक प्रयोजन अघोर मारण और भयंकरतम शत्रु का पूर्णतः विनाश है 12। मंत्र के निरंतर उग्र जप से उत्पन्न घर्षण ऊर्जा सीधे लक्ष्य के प…

काल भैरव मूठ एवं तंत्र काट साधना

काल भैरव का जो नाम ले नर नारी उसके लिए मूठ कभी ना पड़े भारी जय जय काल भैरव देव मूठ चली हवा बनकर काल भैरव चले ढाल बनकर अष्ट हाथ भैरव जी के फैले काट दी जड़ मूठ की चढ़ा दी आकाश नीचे काटी ऊपर काटी काट दी पाताल में 11

अघोर और वाम-मार्ग विद्या में 'मूठ' मारण का सबसे घातक स्वरूप है, जिसे हवा के माध्यम से सीधे लक्ष्य के प्राण हरने के लिए निर्देशित किया जाता है। इस मंत्र का विशुद…

अष्ट भैरव एवं क्षेत्रपाल साधना (भैरव दंड)

रक्षपाल आठवा दंड क्षेत्रपाल भैरव हाथ भर खप्पर तेल सिंदूर रक्षपाल येता अष्ट भैरव सदा रहो कृपाल दंड हमारा पिंड का प्राण वज्र हो काया कर रक्षा काली का पूत आवे दंड जावे दंड सो काल भागे 12 कोस काला दंड शीर कंटक का फोड़ हमको रख दुष्ट को पक ऐता भैरव दंड मंत्र संपूर्ण भया श्री नाथ जी गुरु जी को आदेश आदेश सत्य नमो आदेश गुरु जी को आदेश ओम गुरु 10

यह अष्ट भैरव और नाथ परंपरा का एक प्रचंड रक्षात्मक और संहारक अस्त्र (भैरव दंड) है। इसका मुख्य प्रयोजन साधक के 'पिंड' (भौतिक शरीर और प्राण-कोष) को वज्र के समान अभ…

पीर बजरंगी (हनुमान शाबर सर्वकार्य सिद्धि)

ॐ पीर बजरंगी राम लक्ष्मण के संगी, जहां जहां जाए, फतह के डंके बजाये, दुहाई माता अञ्जनि की आन 9

इस मंत्र का विशुद्ध तांत्रिक प्रयोजन किसी भी लौकिक कार्य (जैसे महत्वपूर्ण साक्षात्कार, जटिल न्यायालयीन प्रकरण, लंबी यात्रा, व्यापारिक समझौता, या जीवन की किसी कठ…

श्री हनुमंत वीर शाबर रक्षा चौकी

ओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6

यह हनुमान परंपरा का एक अमोघ रक्षा अस्त्र है जिसका मुख्य प्रयोजन साधक या किसी पीड़ित व्यक्ति के चारों ओर एक अभेद्य 'चौकी' (तंत्र-सुरक्षा चक्र) का निर्माण करना है…

गुरु गोरखनाथ धन लक्ष्मी आकर्षण साधना

धन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5

इस मंत्र का प्रधान प्रयोजन घोर दरिद्रता का समूल नाश, वर्षों से रुके हुए या फंसे हुए धन की शीघ्र प्राप्ति, और चारों दिशाओं से आर्थिक समृद्धि (बंद धन खुलने) का नि…

शिव-शक्ति एवं गुरु गोरखनाथ आवाहन

ओम गुरु जी शिव बैठे कैलाश विष्णु बैठे बैकुंठ मेरी भक्ति शिव की शक्ति पूजू अमुक देव मनाऊं तो आवे ना आवे तो दुहाई शिव शंकर की दुहाई माता काली की दुहाई गुरु गोरखनाथ की 1

इस मंत्र का केंद्रीय प्रयोजन ब्रह्मांड की किसी भी विशिष्ट ऊर्जा, देवी, या देवता का प्रत्यक्ष आवाहन कर उन्हें साधक के संकल्प के अनुकूल कार्य करने हेतु बाध्य करना…

कामाख्या माई (सर्वकाम मनोवांछित फल सिद्धि)

क्रिम कामाख्या माई निज भैरव के संग आई देवे मनोवांछित सिद्धि पूरे सब कामना लेवे अडहुल का फूल सब स्त्री तोरा रूप मनसा पूरो माई तो शंकर की दुहाई क्रिंग क्रिंग क्रीम 18

इस मंत्र का केंद्रीय प्रयोजन साधक के जीवन में मनोवांछित सिद्धियों की प्राप्ति और अत्यंत क्लिष्ट मनोकामनाओं की पूर्णता है 18। 'अडहुल का फूल' (गुड़हल) कामाख्या मा…

माता कामाख्या (नजर एवं तंत्र बाधा निवारण)

ओम कलीम कामाख्या नजर तोड़े बंधन तोड़े बाधा तोड़े शत्रु की बुद्धि तोड़े ना तोड़े तो उमानंद भैरव की आन 17

इस मंत्र का प्रधान प्रयोजन अत्यंत जटिल और मायावी तांत्रिक बंधनों, गंभीर नजर दोष, और जीवन की अदृश्य बाधाओं का भेदन कर उन्हें छिन्न-भिन्न करना है 17। यह मंत्र केव…

इस्माइल जोगी (इस्लामी शाबर तंत्र - पुल मुसाफिर / दरवेश साधना)

माई नथिया पांचो बावरी पीर गोगा जहार वर तेरे साथ चले चलो इस्माइल जोगी चलो मेरे शब्द पर चलो सत्य पर धर्म पर चलो ना चलो तो आदि शक्ति कामाख्या की आन माता सहजा योगिन की आन शिवशंकर की आन शब्द साचा पेंड काचा देखो इस्माल जोगी तेरे शब्द का तमाशा सत्य का नाम आदेश आदेश आदेश 14

इस जटिल अनुष्ठान का मुख्य प्रयोजन बाबा इस्माइल जोगी और माता श्याम कौर मोहिनी की अतीन्द्रिय शक्तियों को प्रत्यक्ष कर उनसे जीवन के असाध्य और अभीष्ट कार्यों की सिद…

गुरु गोरखनाथ रोग एवं ज्वर निवारण

गुरु गोरखनाथ की दुहाई। रोग भागे, ज्वर सिधाए। शब्द सांचा, पीर मेरा पावना 13

इस मंत्र का एकमात्र और अत्यंत पवित्र प्रयोजन शारीरिक व्याधियों, विशेषकर पुराने और औषधियों से न उतरने वाले भयंकर ज्वर (Fever) और अज्ञात तांत्रिक रोगों का तत्काल…

गुरु गोरखनाथ शत्रु नाशक

ऊँ नमो आदेश गुरु गोरखनाथ की। शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय 13

यह मंत्र कुटिल शत्रुओं के समूल नाश और उनके द्वारा रचे गए तंत्र-मंत्र या भौतिक षड्यंत्रों को नष्ट करने के लिए प्रयुक्त होता है 13। इस शाबर मंत्र में प्रयुक्त पंक…

गुरु गोरखनाथ मोहिनी एवं वशीकरण

गुरु गोरखनाथ की दुहाई, फूल चढ़े तो वह मोहे। शब्द सांचा, पीर मेरा पावना 13

इसका मुख्य और सटीक प्रयोजन सम्मोहन, वशीकरण और किसी विशिष्ट व्यक्ति (जिससे संबंध विच्छेद हो गए हों या जो साधक से विमुख हो गया हो) के हृदय में साधक के प्रति अगाध…

गुरु गोरखनाथ भूत-प्रेत बाधा निवारण

गुरु गोरखनाथ की दुहाई। भूत-प्रेत भागे, मारो घुड़ाई। शब्द सांचा, पीर मेरा पावना। गुरु गोरखनाथ की आग्या 13

इस मंत्र का विशुद्ध प्रयोजन मानव शरीर और मस्तिष्क पर बलपूर्वक अधिकार जमा चुकी अवांछित सूक्ष्म शक्तियों, भूत-प्रेत, पिशाच, और घोर नकारात्मक ऊर्जाओं का समूल निष्क…

नवनाथ एवं गुरु गोरखनाथ रक्षा साधना

भैरव शिव का चेला जहां जहां-जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड काचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा ओम गुरु जी गोरख जति मच्छिंद्र का चेला शिव के रूप में दिखे अलबेला कानों कुंडल गले में नादी हाथ त्रिशूल नाथ है आदि अलख पुरुष को करूं आदेश जन्म जन्म के काटो कलेश भगवा वेश हाथ में खप्पर भैरव शिव का चेला जहां जहां जाऊं नगर डगर लगे वहां फिर मेला शिव का धुना गोरख तापे काल कंटक थर थर कांपे मेरी रक्षा करें नवनाथ रामदूत हनुमंत रिद्धि सिद्धि आंगन विराजे माई अन्नपूर्णा सुखवंत शब्द सांचा पिंड कांचा चलो मंत्र ईश्वर वाचा 2

इस अनुष्ठान का सर्वोपरि प्रयोजन साधक के भौतिक शरीर (पिंड) और उसके आभामंडल के चारों ओर नवनाथों, श्री हनुमान, और भैरव की उग्र शक्तियों द्वारा एक अभेद्य अतीन्द्रिय…