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उद्देश्य अनुसार मंत्र
इस्माइल जोगी (इस्लामी शाबर तंत्र - पुल मुसाफिर / दरवेश साधना)

इस्माइल जोगी (इस्लामी शाबर तंत्र - पुल मुसाफिर / दरवेश साधना) शाबर मंत्र

माई नथिया पांचो बावरी पीर गोगा जहार वर तेरे साथ चले चलो इस्माइल जोगी चलो मेरे शब्द पर चलो सत्य पर धर्म पर चलो ना चलो तो आदि शक्ति कामाख्या की आन माता सहजा योगिन की आन शिवशंकर की आन शब्द साचा पेंड काचा देखो इस्माल जोगी तेरे शब्द का तमाशा सत्य का नाम आदेश आदेश आदेश 14

इस जटिल अनुष्ठान का मुख्य प्रयोजन बाबा इस्माइल जोगी और माता श्याम कौर मोहिनी की अतीन्द्रिय शक्तियों को प्रत्यक्ष कर उनसे जीवन के असाध्य और अभीष्ट कार्यों की सिद्धि करवाना है 14। यह मंत्र तंत्र-शास्त्र

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारशाबर मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

इस जटिल अनुष्ठान का मुख्य प्रयोजन बाबा इस्माइल जोगी और माता श्याम कौर मोहिनी की अतीन्द्रिय शक्तियों को प्रत्यक्ष कर उनसे जीवन के असाध्य और अभीष्ट कार्यों की सिद्धि करवाना है 14। यह मंत्र तंत्र-शास्त्र के 'आन' (कठोर शपथ) सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें इस्माइल जोगी को आदि शक्ति कामाख्या माता और शिवशंकर की शपथ देकर साधक के शब्द (आदेश) पर चलने के लिए विवश किया जाता है 14। सिद्धि प्राप्त होने पर साधक के शरीर पर विशिष्ट ऊर्जा की सवारी (सूक्ष्म उपस्थिति) आ सकती है, जो भविष्य के सटीक संकेत या वचन प्रदान करती है 16। इस सिद्ध विद्या का उपयोग विशेष रूप से रुके हुए और मृतप्राय कारोबार को पुनः गति प्रदान करने, विवाह आदि में आ रही अत्यंत जटिल बाधाओं को दूर करने और जनमानस के कल्याण हेतु किया जाता है; किंतु अनैतिक कार्यों में इसका प्रयोग सर्वथा निषिद्ध है, अन्यथा शक्ति साधक का ही सर्वनाश कर देती है 16।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

इस जटिल अनुष्ठान का मुख्य प्रयोजन बाबा इस्माइल जोगी और माता श्याम कौर मोहिनी की अतीन्द्रिय शक्तियों को प्रत्यक्ष कर उनसे जीवन के असाध्य और अभीष्ट कार्यों की सिद्धि करवाना है 14

02

यह मंत्र तंत्र-शास्त्र के 'आन' (कठोर शपथ) सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें इस्माइल जोगी को आदि शक्ति कामाख्या माता और शिवशंकर की शपथ देकर साधक के शब्द (आदेश) पर चलने के लिए विवश किया जाता है 14

03

सिद्धि प्राप्त होने पर साधक के शरीर पर विशिष्ट ऊर्जा की सवारी (सूक्ष्म उपस्थिति) आ सकती है, जो भविष्य के सटीक संकेत या वचन प्रदान करती है 16

04

इस सिद्ध विद्या का उपयोग विशेष रूप से रुके हुए और मृतप्राय कारोबार को पुनः गति प्रदान करने, विवाह आदि में आ रही अत्यंत जटिल बाधाओं को दूर करने और जनमानस के कल्याण हेतु किया जाता है

जाप विधि

इस्माइल जोगी की यह 'पुल मुसाफिर' साधना अत्यंत उग्र और गोपनीय 41-दिवसीय अनुष्ठान है, जिसे केवल एक सिद्ध गुरु के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में ही संपन्न किया जाना चाहिए; अन्यथा ऊर्जा के असंतुलन से साधक को भयंकर मानसिक व शारीरिक नुकसान उठाना पड़ सकता है 14। साधक को संपूर्ण 41 दिनों तक पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है; मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज व अन्य तामसिक पदार्थों का सेवन सर्वथा वर्जित है 14। साधना काल में भूमि पर शयन (बिना पलंग के) करना आवश्यक है। अनुष्ठान के लिए काले हकीक अथवा रुद्राक्ष की माला का उपयोग किया जाता है। साधक काले या सफेद रंग के वस्त्र धारण कर, उसी रंग के आसन पर बैठकर रात्रि में जप आरंभ करता है 14। नित्य प्रति न्यूनतम 5 माला का जप अनिवार्य है। साधना स्थल पर इस्माइल जोगी के नाम से तिलों के तेल अथवा शुद्ध देसी घी का अखंड दीपक प्रज्ज्वलित किया जाना चाहिए 14। भोग के रूप में लड्डू, रोट या पूरों का नैवेद्य नित्य अर्पित किया जाता है 14। 41वें दिन, या जब अनुष्ठान पूर्ण हो, तब विशेष विधि से उस भोग (खीर या पत्तलों) को अपने सिर के ऊपर से और गुरु के धुने के ऊपर से सात-सात बार उसार कर (एंटी-क्लॉकवाइज घुमाकर) किसी पीपल या बरगद (बड़) के वृक्ष के नीचे एकांत में रखा जाता है, और शेष भाग गौ माता तथा कुत्तों (दरवेश) को खिलाया जाता है 15। 41-दिवसीय साधना के कठोर नियम विवरण वस्त्र एवं आसन पूर्णतः काले अथवा पूर्णतः सफेद 14 माला एवं जप काले हकीक/रुद्राक्ष माला, न्यूनतम 5 माला नित्य 14 दीपक एवं भोग तिल का तेल/देसी घी दीपक; लड्डू, रोट या पूरों का भोग 14 विसर्जन विधि 7 बार सिर व धुने से उसार कर पीपल/बरगद नीचे रखना 15

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