राहु नवग्रह मंत्र
ॐ क्रीं क्रीं हूं हूं टं टङ्कधारिणे राहवे रं ह्रीं श्रीं भैं स्वाहा॥
घोर तांत्रिक बाधाओं (अभिचार कर्म या काले जादू), विष प्रभाव, और ऊपरी हवा (Negative astral entities) के निवारण तथा शत्रुओं को भ्रमित करने हेतु यह शक्तिशाली आगम मंत्र है। 8
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
घोर तांत्रिक बाधाओं (अभिचार कर्म या काले जादू), विष प्रभाव, और ऊपरी हवा (Negative astral entities) के निवारण तथा शत्रुओं को भ्रमित करने हेतु यह शक्तिशाली आगम मंत्र है। 8
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर तांत्रिक बाधाओं (अभिचार कर्म या काले जादू), विष प्रभाव, और ऊपरी हवा (Negative astral entities) के निवारण तथा शत्रुओं को भ्रमित करने हेतु यह शक्तिशाली आगम मंत्र है
जाप विधि
रात्रिकाल में शिव या कालभैरव आराधना के साथ भोजपत्र या अष्टधातु के राहु यंत्र के समक्ष हकीक या रुद्राक्ष की माला से जप। 8
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ॐ भास्कराय नमः
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
dhyan mantraशान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिहृद्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
beej mantraॐ
sabar mantraओम ह्रीम नजर उतरजा कुरु कुरु स्वाहा 26
mool mantraॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः