चंद्र नवग्रह मंत्र
ॐ निशाकराय विद्महे कलानाथाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्।
कला, संगीत और साहित्य के क्षेत्र में सफलता, भावनाओं के ज्वार पर नियंत्रण और व्यक्तित्व में आकर्षण वृद्धि हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कला, संगीत और साहित्य के क्षेत्र में सफलता, भावनाओं के ज्वार पर नियंत्रण और व्यक्तित्व में आकर्षण वृद्धि हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
कला, संगीत और साहित्य के क्षेत्र में सफलता, भावनाओं के ज्वार पर नियंत्रण और व्यक्तित्व में आकर्षण वृद्धि हेतु
जाप विधि
शुक्ल पक्ष के सोमवार से पूर्णिमा तक नित्य एक सौ आठ बार जप। 16
विशेष टिप्पणियाँ
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हस्ति-पिशाचि-लिखे स्वाहा ।
mool mantraॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः (सामान्य मूल: ॐ शनैश्चराय नमः)
jap mantraॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय वैराजमूर्तये मेघात्मने श्रीं नरसिंहवपुषे नमः
gyan mantraॐ श्रीं ह्लौं ॐ नमो भगवते हयग्रीवाय विष्णवे मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा ॥
kaamya mantraया श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥
kavach mantraॐ भूर्भुव: स्व: प्रांचामा पातु भूतेशः अग्ने पातु शंकर दक्षिणे पातुमा रुद्रो नैऋत्य स्थानु रेवच पश्चिमे खंड परशु वायव्या चंद्रशेखर उत्तरे गिरीशः पातु चैशान्य ईश्वर स्वयं उर्ध्वे मुंड सदा पातु चाध्य मृत्युंजय स्वयं जले स्थले चांदरीक्षे स्वप्ने जागरने सदा पिना कितुमा प्रीत्या भक्तम वैभक्त वत्सल य: सदा धारयेन्मर्त्य: शैवं कवचमुत्तमम् । न तस्य जायते क्वापि भयं शंभोरनुग्रहात् ॥ 30॥ इति अमोघ शिव कवच सम्पूर्ण ॥ 4