चंद्र नवग्रह मंत्र
ॐ निशाकराय विद्महे कलानाथाय धीमहि तन्नः सोमः प्रचोदयात्।
कला, संगीत और साहित्य के क्षेत्र में सफलता, भावनाओं के ज्वार पर नियंत्रण और व्यक्तित्व में आकर्षण वृद्धि हेतु। 16
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
कला, संगीत और साहित्य के क्षेत्र में सफलता, भावनाओं के ज्वार पर नियंत्रण और व्यक्तित्व में आकर्षण वृद्धि हेतु। 16
इस मंत्र से क्या होगा?
कला, संगीत और साहित्य के क्षेत्र में सफलता, भावनाओं के ज्वार पर नियंत्रण और व्यक्तित्व में आकर्षण वृद्धि हेतु
जाप विधि
शुक्ल पक्ष के सोमवार से पूर्णिमा तक नित्य एक सौ आठ बार जप। 16
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ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्माऽमृतं गमय ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
kavach mantraनासां वैवस्वत: पातु मुखं मे भास्कर: सदा । नाभिं गृहपति: पातु मन्द: पातु कटिं तथा । पदौ मन्दगति: पातु सर्वांग पातु पिप्पल: । आंगो पांगानी सर्वानी रक्षे में सूर्य नंदन इत्तेत कवच देव पठे सूर्य सुतस्य यह नतस्य जायते पीडा प्रीतो भवति सूर्य जह व्यय जन्म द्वितीय मृत्यु स्थान गतो पिवा कलस्थो गतो वापी सुप्रीतु सदाशनी अष्टमस्थे सूर्यसुते व्यये जन्म द्वितीयगे। कवचं पठते नित्यं न पीडा जायते क्वचित्। इत्य तत कवचम दिव्यम सौरे निर्मित पुरा जन्म लग्न स्थिता दोषा सर्वान नाश्यते प्रभु इति शनि कवच संपूर्णं ॥ 20
sabar mantraओम नमो भूत प्रेत पिशाच दुष्ट दृष्टि विनाशाय ओम क्लीम स्वाहा 27
dhyan mantraमनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
beej mantraहूँ
gyan mantraॐ वागीश्वर्यै विद्महे वाग्वादिन्यै धीमहि तन्नः सरस्वती प्रचोदयात् ॥