शुद्ध शिव / चिदानंद (निराकार आत्मतत्त्व) ध्यान मंत्र
मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्राणनेत्रे। न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायुश्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
शरीर और सांसारिक स्मृतियों के साथ जुड़े मिथ्या तादात्म्य को तोड़ना, अहंकार का नाश करना और मोक्ष की उच्च अवस्था में स्थित होना।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
यह मंत्र क्यों?
शरीर और सांसारिक स्मृतियों के साथ जुड़े मिथ्या तादात्म्य को तोड़ना, अहंकार का नाश करना और मोक्ष की उच्च अवस्था में स्थित होना।
इस मंत्र से क्या होगा?
शरीर और सांसारिक स्मृतियों के साथ जुड़े मिथ्या तादात्म्य को तोड़ना, अहंकार का नाश करना और मोक्ष की उच्च अवस्था में स्थित होना
जाप विधि
स्थिर बैठकर 'नेति-नेति' सिद्धांत का प्रयोग करें। मन, बुद्धि, अहंकार और पंचमहाभूतों से चेतना को अलग करते हुए इस श्लोक का अत्यंत धीमी गति से मानसिक पाठ करें। स्वयं को केवल 'चिदानंद रूप शिव' मानते हुए स्थिर हो जाएं।
विशेष टिप्पणियाँ
अलग-अलग श्रेणियों से
हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें
ह्रीं श्रीं हंसः ह्सौं स्वाहा
siddh mantraॐ महा काल्यै छ विद्महे स्मसन वासिन्यै छ धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात
sabar mantraदुहाई लोना चमारिन की, आन बीर मसान की (अमुक का नाम) 20
gyan mantraशुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् । हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ॥
bhakti mantraराम बोलो राम बोलो बोलो बोलो राम
navgrah mantraॐ श्रीं क्रीं ह्रां चं चन्द्राय नमः॥