देवी गायत्री / सवितृ (ब्रह्मांडीय ज्योति) ध्यान मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
अज्ञान के अंधकार को दूर कर प्रज्ञा (Intellect) को जागृत करना, आंतरिक प्रकाश का प्रस्फुटन, प्राण-ऊर्जा की वृद्धि, तथा चेतना का उच्चतर रूपांतरण।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अज्ञान के अंधकार को दूर कर प्रज्ञा (Intellect) को जागृत करना, आंतरिक प्रकाश का प्रस्फुटन, प्राण-ऊर्जा की वृद्धि, तथा चेतना का उच्चतर रूपांतरण।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञान के अंधकार को दूर कर प्रज्ञा (Intellect) को जागृत करना, आंतरिक प्रकाश का प्रस्फुटन, प्राण-ऊर्जा की वृद्धि, तथा चेतना का उच्चतर रूपांतरण
जाप विधि
सूर्योदय या ब्रह्म मुहूर्त में इसका ध्यान सर्वोत्तम है। इसे 108 बार 20 मिनट के भीतर जपा जाता है। चार भागों (चतुष्पदी) में प्रत्येक भाग के बाद थोड़ा विराम दें और प्रकाश पर एकाग्रता रखते हुए उपांशु जप करें।
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ओम चौकी हनुमत वीर की बाण ध्वजा फहराए मारू मारू मारुत सुत मुष्टिक शत्रु नसाय मेरे इष्ट रामचंद्र जी अगुवा हनुमंता वीर चौकी सुदर्शन चक्र की रक्षा करें शरीर टोना ब्रह्म भूत प्रेत संग डाईन डाकिनी सांप बिच्छू चोर बट सब कुछ निष्फल जाई 6
vaidik mantraॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षं शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वं शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥
naam mantraपरशुराम
kaamya mantraॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
tantrik mantraॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्
jap mantraॐ गण गणपतये नमः