देवी गायत्री / सवितृ (ब्रह्मांडीय ज्योति) ध्यान मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
अज्ञान के अंधकार को दूर कर प्रज्ञा (Intellect) को जागृत करना, आंतरिक प्रकाश का प्रस्फुटन, प्राण-ऊर्जा की वृद्धि, तथा चेतना का उच्चतर रूपांतरण।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अज्ञान के अंधकार को दूर कर प्रज्ञा (Intellect) को जागृत करना, आंतरिक प्रकाश का प्रस्फुटन, प्राण-ऊर्जा की वृद्धि, तथा चेतना का उच्चतर रूपांतरण।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञान के अंधकार को दूर कर प्रज्ञा (Intellect) को जागृत करना, आंतरिक प्रकाश का प्रस्फुटन, प्राण-ऊर्जा की वृद्धि, तथा चेतना का उच्चतर रूपांतरण
जाप विधि
सूर्योदय या ब्रह्म मुहूर्त में इसका ध्यान सर्वोत्तम है। इसे 108 बार 20 मिनट के भीतर जपा जाता है। चार भागों (चतुष्पदी) में प्रत्येक भाग के बाद थोड़ा विराम दें और प्रकाश पर एकाग्रता रखते हुए उपांशु जप करें।
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