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उद्देश्य अनुसार मंत्र
कामरूप कामाख्या (सर्व इच्छा पूर्ति तंत्र)

कामरूप कामाख्या (सर्व इच्छा पूर्ति तंत्र) शाबर मंत्र

ओम नमो आदेश गुरु को कामरूप कामाख्या माई अपनी शक्ति से अमुक मेरी इच्छा पूरी करो ना करो तो ईश्वर महादेव की दुहाई 19

यह मंत्र जीवन के हर क्षेत्र की बाधाओं को नष्ट कर एक अचूक 'इच्छा-पूर्ति कल्पवृक्ष' के रूप में निर्मित है 19। चाहे वह मनचाहे रोजगार (Job) की प्राप्ति हो, असीमित धन संपत्ति अर्जित करना हो, भयंकर कर्ज (De

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारशाबर मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

यह मंत्र जीवन के हर क्षेत्र की बाधाओं को नष्ट कर एक अचूक 'इच्छा-पूर्ति कल्पवृक्ष' के रूप में निर्मित है 19। चाहे वह मनचाहे रोजगार (Job) की प्राप्ति हो, असीमित धन संपत्ति अर्जित करना हो, भयंकर कर्ज (Debt) के दुष्चक्र से मुक्ति पानी हो, अथवा परिवार और घर में चल रहे भारी तनाव और क्लेश को शांत करना हो—यह एक ही मंत्र महादेव की दुहाई के बल पर कामरूप कामाख्या की सर्वोपरि शक्ति को जाग्रत कर हर प्रकार की सांसारिक समस्या का समाधान कर देता है 19। यह साधक की इच्छा-शक्ति (Willpower) को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ सिंक्रनाइज़ कर देता है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

यह मंत्र जीवन के हर क्षेत्र की बाधाओं को नष्ट कर एक अचूक 'इच्छा-पूर्ति कल्पवृक्ष' के रूप में निर्मित है 19

02

चाहे वह मनचाहे रोजगार (Job) की प्राप्ति हो, असीमित धन संपत्ति अर्जित करना हो, भयंकर कर्ज (Debt) के दुष्चक्र से मुक्ति पानी हो, अथवा परिवार और घर में चल रहे भारी तनाव और क्लेश को शांत करना हो—यह एक ही मंत्र महादेव की दुहाई के बल पर कामरूप कामाख्या की सर्वोपरि शक्ति को जाग्रत कर हर प्रकार की सांसारिक समस्या का समाधान कर देता है 19

03

यह साधक की इच्छा-शक्ति (Willpower) को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ सिंक्रनाइज़ कर देता है

जाप विधि

यह एक अत्यंत ही बहु-आयामी (Multi-purpose) और लचीला शाबर मंत्र है जिसे जीवन की किसी भी विशिष्ट कामना की पूर्ति हेतु सिद्ध किया जा सकता है। जप विधि में सबसे महत्त्वपूर्ण और ध्यान देने योग्य चरण यह है कि साधक को 'अमुक' शब्द के स्थान पर अपनी उस विशिष्ट इच्छा या लक्षित कार्य का स्पष्ट रूप से उच्चारण करना होता है (जैसे: 'अमुक' के स्थान पर 'मेरी नौकरी लग जाए', या 'मेरा अमुक व्यक्ति से विवाह हो जाए', या 'मेरा कर्ज समाप्त हो जाए' बोलना होता है) 19। बाकी का संपूर्ण मंत्र यथावत बोला जाता है। इस मंत्र को नित्य एकाग्रचित्त होकर एक निर्धारित संख्या (जैसे 108 बार) में जपना चाहिए और इस नियम को तब तक जारी रखना चाहिए जब तक कि अभीष्ट मनोकामना भौतिक जगत में पूर्ण न हो जाए 19।

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