माँ वाग्देवी सरस्वती ज्ञान मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः ॥
बुद्धिमत्ता, प्रज्ञा और स्मरण शक्ति का विस्तार 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
बुद्धिमत्ता, प्रज्ञा और स्मरण शक्ति का विस्तार 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
बुद्धिमत्ता, प्रज्ञा और स्मरण शक्ति का विस्तार
जाप विधि
स्फटिक माला से एकाग्रचित्त होकर जप 4।
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लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
tantrik mantraॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्
kavach mantraसकलायुध सम्पूर्ण निखिलाङ्ग सुदर्शन यदम कवच दिव्यम परमानंद दायिनं सौदर्शन यो सदा शुद्ध पठे नरह तस्या सिद्धि विपुला करस्था भवति ध्रुवं कोष्माण्ड चण्ड भूता ये दुष्टा ग्रहा स्मृता पलायन्ते निशंभीता वर्मनोस्य प्रभावतः कुष्ठा पस्मा गुलमा व्याध कर्म हेतुका नश्य तन मंत्रिता भूपाना सप्त दिनावधी अनेन मन्त्रिता मृतानां तुलसी मूल संस्थितां ललाटे तिलकं कृत्वा मोहये त्रिजगन्नरः। 17
sabar mantraझाड़ि झाड़ि कापड़ पिन्दि । वीर मुष्टे बांधि बाल । बुले एलाम मशान भूम होते भैरव। कटार हाते। लोहार बाड़ी। बाम हाते चामदड़ि। आज्ञा दिल राजा चुडं हाते । लोहार किला । मुद्गर धिनि। विगलि घुंडिकार आज्ञे 25
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