माँ वाग्देवी सरस्वती ज्ञान मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः ॥
बुद्धिमत्ता, प्रज्ञा और स्मरण शक्ति का विस्तार 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
बुद्धिमत्ता, प्रज्ञा और स्मरण शक्ति का विस्तार 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
बुद्धिमत्ता, प्रज्ञा और स्मरण शक्ति का विस्तार
जाप विधि
स्फटिक माला से एकाग्रचित्त होकर जप 4।
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शम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
vaidik mantraॐ यस्मिन्नृचः साम यजूंषि यस्मिन् प्रतिष्ठिता रथनाभाविवाराः । यस्मिंश्चित्तं सर्वमोतं प्रजानां तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु ।।
jap mantraॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
tantrik mantraक ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं स क ल ह्रीं
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mool mantraॐ श्री हनुमते नमः