माँ वाग्देवी सरस्वती ज्ञान मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः ॥
बुद्धिमत्ता, प्रज्ञा और स्मरण शक्ति का विस्तार 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
बुद्धिमत्ता, प्रज्ञा और स्मरण शक्ति का विस्तार 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
बुद्धिमत्ता, प्रज्ञा और स्मरण शक्ति का विस्तार
जाप विधि
स्फटिक माला से एकाग्रचित्त होकर जप 4।
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ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः॥
tantrik mantraॐ क्षं कृष्ण वाससे, सिंह वदने, महा वदने, महा भैरवि, सर्व शत्रु कर्म विध्वंसिनि, परमंत्र छेदिनि, सर्व भूत दमनि, सर्व भूतां बंध बंध, सर्व विघ्नान् छिन्दि छिन्दि, सर्व व्याधिं निकृंत निकृंत, सर्व दुष्टान् पक्ष पक्ष, ज्वाल जिव्हे, कराल वक्त्रे, कराल दंष्ट्रे, प्रत्यंगिरे ह्रीं स्वाहा
kavach mantraशम्भुर्मे मस्तकं पातु मुखं पातु महेश्वरः। दन्तपङ्क्तिं च नीलकण्ठोऽप्यधरोष्ठं हरः स्वयम्। कण्ठं पातु चन्द्रचूडः स्कन्धौ वृषवाहनः। वक्षःस्थलं नीलकण्ठः पातु पृष्ठं दिगम्बरः। स्वप्ने जागरणे चैव स्थाणुर्मे पातु सन्ततम्। 8
dhyan mantraगजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
beej mantraब्रौं
sabar mantraराम कुण्डली, ब्रह्मचाक । तेतीस कोटि देवा देवा अमुक की बेड़ियां । अमुकेर अंकेर बाण काटम्। शर काटम् । संधान काटम् । कुज्ञान काटम् । कारवणे काटे । राजा रामचन्द्रेर आज्ञा । राजा रामचन्द्ररे ऐई झण्डी अमुकेर अंगे शीघ्र लागूगे 25