ब्रह्मविद्या / परमात्मा (विद्यारम्भ शांति मंत्र) ज्ञान मंत्र
ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै । तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
गुरु-शिष्य के मध्य ज्ञान का निर्बाध प्रवाह, एकाग्रता, और विद्या में तेजस्वी सफलता की प्राप्ति 20।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
गुरु-शिष्य के मध्य ज्ञान का निर्बाध प्रवाह, एकाग्रता, और विद्या में तेजस्वी सफलता की प्राप्ति 20।
इस मंत्र से क्या होगा?
गुरु-शिष्य के मध्य ज्ञान का निर्बाध प्रवाह, एकाग्रता, और विद्या में तेजस्वी सफलता की प्राप्ति
जाप विधि
विद्यालय, गुरुकुल या किसी भी शास्त्र-अध्ययन को आरम्भ करने से पूर्व अनिवार्य पाठ 20।
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विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
mool mantraॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
jap mantraॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय वैराजमूर्तये मेघात्मने श्रीं नरसिंहवपुषे नमः
sabar mantraरक्षपाल आठवा दंड क्षेत्रपाल भैरव हाथ भर खप्पर तेल सिंदूर रक्षपाल येता अष्ट भैरव सदा रहो कृपाल दंड हमारा पिंड का प्राण वज्र हो काया कर रक्षा काली का पूत आवे दंड जावे दंड सो काल भागे 12 कोस काला दंड शीर कंटक का फोड़ हमको रख दुष्ट को पक ऐता भैरव दंड मंत्र संपूर्ण भया श्री नाथ जी गुरु जी को आदेश आदेश सत्य नमो आदेश गुरु जी को आदेश ओम गुरु 10
beej mantraक्रीं
dhyan mantraध्येयः सदा सवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः। केयूरवान्मकरकुण्डलवान् किरीटी हारी हिरण्मयवपुर्धृतशङ्खचक्रः॥