माँ सरस्वती (शारदा वन्दना) ज्ञान मंत्र
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥
अज्ञान, मानसिक जड़ता और आलस्य का समूल नाश तथा शुद्ध विद्या की प्राप्ति 4।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अज्ञान, मानसिक जड़ता और आलस्य का समूल नाश तथा शुद्ध विद्या की प्राप्ति 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञान, मानसिक जड़ता और आलस्य का समूल नाश तथा शुद्ध विद्या की प्राप्ति
जाप विधि
नित्य प्रातःकाल वैदिक शिक्षा या किसी भी अध्ययन के पूर्व पाठ 4।
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न यस्य देवा ऋषयः पदं विदु- र्जन्तुः पुनः कोsर्हति गन्तुमीरितुम । यथा नटस्याकृतिभिर्विचेष्टतो दुरत्ययानुक्रमणः स मावतु ॥ 4
siddh mantraॐ कं कामवशितायै नमः स्वाहा ।
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
bhakti mantraॐ श्री बालपरमेश्वर्यै नमः
kaamya mantraदुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥
mool mantraॐ श्रीं ह्रीं श्रीं सर्व मङ्गलाय पिङ्गलाय ॐ नमः