भगवान मेधा दक्षिणामूर्ति (ज्ञान के आदिगुरु शिव स्वरूप) ज्ञान मंत्र
ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा ॥
अज्ञानता का निवारण, आत्मज्ञान, विलक्षण स्मरण शक्ति और विद्यार्जन में पूर्ण सिद्धि 16।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
अज्ञानता का निवारण, आत्मज्ञान, विलक्षण स्मरण शक्ति और विद्यार्जन में पूर्ण सिद्धि 16।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञानता का निवारण, आत्मज्ञान, विलक्षण स्मरण शक्ति और विद्यार्जन में पूर्ण सिद्धि
जाप विधि
ऋष्यादि न्यास, ध्यान एवं पञ्चोपचार पूजन के पश्चात् नित्य १०८ बार माला से जप। पूर्ण फल हेतु ३,२०,००० का पुरश्चरण 16।
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ॐ श्री सरस्वत्यै नमः
kavach mantraक्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
naam mantraदामोदर
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vaidik mantraॐ मेधां म इन्द्रो दधातु मेधां देवी सरस्वती । मेधां मे अश्विनावुभावाधत्तां पुष्करस्रजौ ॥
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