माता महाकाली (श्री काली कवच) कवच मंत्र
क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
घोर शत्रुओं का उच्चाटन व नाश, दरिद्रता का तत्काल शमन, अकाल मृत्यु व घोर संकट से अभेद्य सुरक्षा, और समस्त संपत्तियों तथा सिद्धियों की प्राप्ति 25।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
घोर शत्रुओं का उच्चाटन व नाश, दरिद्रता का तत्काल शमन, अकाल मृत्यु व घोर संकट से अभेद्य सुरक्षा, और समस्त संपत्तियों तथा सिद्धियों की प्राप्ति 25।
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर शत्रुओं का उच्चाटन व नाश, दरिद्रता का तत्काल शमन, अकाल मृत्यु व घोर संकट से अभेद्य सुरक्षा, और समस्त संपत्तियों तथा सिद्धियों की प्राप्ति
जाप विधि
इस अमोघ तंत्रोक्त कवच का प्रातः (प्रभात समय), पूजा काल और सायं काल में नियम एवं पूर्ण निष्ठापूर्वक पाठ करें 25।
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