ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
उद्देश्य अनुसार मंत्र
माता महाकाली (श्री काली कवच)

माता महाकाली (श्री काली कवच) कवच मंत्र

क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23

घोर शत्रुओं का उच्चाटन व नाश, दरिद्रता का तत्काल शमन, अकाल मृत्यु व घोर संकट से अभेद्य सुरक्षा, और समस्त संपत्तियों तथा सिद्धियों की प्राप्ति 25।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारकवच मंत्र
प्रयोजन

यह मंत्र क्यों?

घोर शत्रुओं का उच्चाटन व नाश, दरिद्रता का तत्काल शमन, अकाल मृत्यु व घोर संकट से अभेद्य सुरक्षा, और समस्त संपत्तियों तथा सिद्धियों की प्राप्ति 25।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

घोर शत्रुओं का उच्चाटन व नाश, दरिद्रता का तत्काल शमन, अकाल मृत्यु व घोर संकट से अभेद्य सुरक्षा, और समस्त संपत्तियों तथा सिद्धियों की प्राप्ति

जाप विधि

इस अमोघ तंत्रोक्त कवच का प्रातः (प्रभात समय), पूजा काल और सायं काल में नियम एवं पूर्ण निष्ठापूर्वक पाठ करें 25।

विशेष टिप्पणियाँ

इसे भी पढ़ें

अलग-अलग श्रेणियों से

हर श्रेणी से एक चुनिंदा मंत्र — नया खोजें

tantrik mantra

ॐ नमो भगवते महानृसिंहाय सिंहाय सिंहमुखाय विकटाय वज्रनखाय मां रक्ष रक्ष ममशरीरं नखशिखापर्यन्तं रक्ष रक्ष कुरु कुरु मदीयं शरीरं वज्राङ्गम् कुरु कुरु परयन्त्र परमन्त्र परतन्त्राणां क्षिणु क्षिणु स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा

navgrah mantra

प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥

dhyan mantra

बर्हापीडं नटवरवपुः कर्णयोः कर्णिकारं बिभ्रद्वासः कनककपिशं वैजयन्तीं च मालाम्। रन्ध्रान् वेणोरधरसुधया पूरयन् गोपवृन्दैर्वृन्दारण्यं स्वपदरमणं प्राविशद् गीतकीर्तिः॥

beej mantra

द्रां

sabar mantra

ऊँ नमो आदेश गुरु गोरखनाथ की। शत्रु सवा लाख, एक मरे तो सब सिधाय 13

mool mantra

ॐ यमाय नमः